Bengal Election 2026 : बंगाल में भाजपा की चक्रव्यूह रचना नितिन नवीन ने ममता सरकार को घेरा
News India Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की घोषणा के साथ ही सियासी पारा अपने चरम पर पहुँच गया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष (संगठन) नितिन नवीन ने बुधवार को कोलकाता पहुँचकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर तीखा हमला बोला। दक्षिणेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद पत्रकारों से बात करते हुए नवीन ने राज्य सरकार पर तुष्टीकरण और धार्मिक भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को जानबूझकर चोट पहुँचाई जा रही है।
"दुर्भाग्यपूर्ण है बंगाल की स्थिति" – नितिन नवीन का कड़ा प्रहार
नितिन नवीन ने ममता सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए इसे 'दोहरा मापदंड' करार दिया। उन्होंने कहा:
"पश्चिम बंगाल अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, लेकिन आज यहाँ ऐसे तत्व हावी हैं जो हमारी संस्कृति पर प्रहार कर रहे हैं। यहाँ नमाज पढ़ने की तो खुली छूट है, लेकिन मां दुर्गा का पंडाल लगाने के लिए श्रद्धालुओं को हाईकोर्ट के दरवाजे खटखटाने पड़ते हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।"
उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने मां काली से पश्चिम बंगाल को 'भ्रष्टाचार मुक्त' और 'विकसित बंगाल' बनाने का आशीर्वाद मांगा है।
भाजपा का 'चक्रव्यूह': बूथ स्तर पर लामबंदी और डिजिटल वार
नितिन नवीन का यह दो दिवसीय दौरा केवल एक नियमित समीक्षा नहीं, बल्कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा तैयार की गई 'चक्रव्यूह रणनीति' का हिस्सा माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने बंगाल फतह के लिए त्रिस्तरीय योजना तैयार की है:
सूक्ष्म स्तर पर बूथ प्रबंधन: नवीन ने राज्य इकाई को निर्देश दिए हैं कि हर बूथ पर 'सप्तऋषि' (सात प्रमुख कार्यकर्ता) की टोली तैनात की जाए।
डिजिटल और सोशल मीडिया वार: पार्टी की डिजिटल पहुंच को मजबूत करने के लिए सोशल मीडिया टीम के साथ विशेष रणनीतिक बैठक की गई। इसका उद्देश्य सरकारी विफलताओं को सीधे जनता तक पहुँचाना है।
स्थानीय विमर्श (Local Narrative): बंद कमरे में हुई बैठकों में नवीन ने जोर दिया कि चुनाव प्रचार में राष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ स्थानीय समस्याओं और भ्रष्टाचार के मामलों को प्राथमिकता दी जाए।
संगठनात्मक फेरबदल के संकेत
मंगलवार से शुरू हुई इस यात्रा के दौरान नितिन नवीन ने राज्य के शीर्ष नेताओं और वरिष्ठ संगठनात्मक पदाधिकारियों के साथ लंबी चर्चा की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अध्यक्ष का जोर संगठन के भीतर समन्वय की कमी को दूर करने और जमीनी स्तर के नेटवर्क को सक्रिय करने पर है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि चुनाव प्रचार के संदेश (Campaign Messaging) को धार देने के लिए संवाद टीम को नई गाइडलाइन्स दी गई हैं, जिससे संकेत मिलता है कि भाजपा इस बार सत्ता हासिल करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी।