डिंपल यादव का केंद्र पर बड़ा हमला बोलीं ईरान के खिलाफ भारत के कड़े रुख से गहराया एलपीजी संकट
News India Live, Digital Desk : समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने देश में गहराते एलपीजी (LPG) संकट को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा प्रहार किया है। डिंपल यादव ने दावा किया है कि भारत की 'ईरान नीति' में आए बदलाव और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान के खिलाफ भारत के व्यवहार के कारण रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की गलत विदेश नीति का खामियाजा अब देश की आम जनता और मध्यम वर्ग को महंगे और दुर्लभ होते एलपीजी सिलेंडरों के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
"ईरान से बिगड़े संबंधों का असर रसोई तक पहुँचा" डिंपल यादव डिंपल यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ईरान भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण साझेदार रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वैश्विक दबाव में आकर भारत ने ईरान के साथ अपने व्यापारिक और कूटनीतिक संतुलन को बिगाड़ लिया है। सांसद ने तर्क दिया: भारत सरकार का ईरान के प्रति जो व्यवहार रहा है, उसी का नतीजा है कि आज देश में एलपीजी का संकट खड़ा हो गया है। जब हम अपने ऊर्जा सहयोगियों को नाराज करेंगे, तो उसका सीधा असर हमारी आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ेगा। आज गृहणियां परेशान हैं और सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने में लगी है।"
एलपीजी की किल्लत और बढ़ती कीमतों पर घेरा सपा सांसद ने केवल आपूर्ति ही नहीं, बल्कि एलपीजी की बढ़ती कीमतों को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि एक तरफ उज्ज्वला योजना के नाम पर प्रचार किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ सिलेंडर की कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। डिंपल यादव ने मांग की कि सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर एलपीजी की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने रणनीतिक हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
भाजपा का पलटवार: "भ्रम फैला रहा विपक्ष" डिंपल यादव के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि एलपीजी की आपूर्ति का ईरान के साथ मौजूदा कूटनीतिक संबंधों से कोई सीधा लेना-देना नहीं है। सरकार का तर्क है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वैश्विक स्तर पर विविध स्रोतों (Diversified Sources) का उपयोग कर रहा है और विपक्ष केवल जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है।
रणनीतिक विशेषज्ञों की राय राजनीतिक और सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि डिंपल यादव का यह बयान भारत की विदेश नीति को घरेलू मुद्दों से जोड़ने की एक कोशिश है। हालांकि, ईरान पर लगे प्रतिबंधों और चाबहार बंदरगाह जैसे प्रोजेक्ट्स के बीच भारत के संबंधों में उतार-चढ़ाव जरूर रहे हैं, लेकिन एलपीजी संकट के पीछे अन्य वैश्विक कारण और घरेलू वितरण बाधाएं भी हो सकती हैं। फिलहाल, डिंपल यादव के इस बयान ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।