घर से बाहर निकलने से पहले हो जाएं सावधान, झारखंड में शुरू हुआ कड़ाके की ठंड का अगला राउंड

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News India Live, Digital Desk : झारखंड में अब सिर्फ़ 'सुबह-शाम की ठंड' वाला मौसम नहीं रह गया है। दिसंबर की इन आख़िरी रातों ने यह जता दिया है कि असली सर्दी तो अब शुरू हुई है। जो लोग सोच रहे थे कि शायद इस बार दिसंबर प्यासा ही बीत जाएगा, उनके लिए मौसम विभाग (IMD) की ताज़ा रिपोर्ट किसी झटके से कम नहीं है।

रांची से लेकर चाईबासा और जमशेदपुर से लेकर डालटनगंज तक, समूचा झारखंड अब सफेद कोहरे और कड़ाके की सर्दी की गिरफ्त में है। मौसम विभाग ने राज्य के 12 जिलों के लिए 'यलो अलर्ट' (Yellow Alert) जारी कर दिया है। इसका सीधा मतलब ये है कि अब अपनी रजाई और हीटर निकालने में बिल्कुल देरी न करें।

किन जिलों में सबसे ज़्यादा 'सितम'?
यलो अलर्ट के घेरे में झारखंड का उत्तर-पश्चिमी हिस्सा सबसे ज़्यादा है। रांची के साथ-साथ लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, पलामू और गढ़वा जैसे जिलों में रात की ठंड ने हड्डियों को कँपाना शुरू कर दिया है। पलामू के कुछ इलाकों में तो पारा इतना गिर गया है कि सुबह सड़कों पर दृश्यता (Visibility) शून्य के करीब पहुँच रही है। जो लोग हाईवे पर गाड़ी चला रहे हैं, उनके लिए यह समय सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण है।

अचानक क्यों बढ़ गई ये गलन?
विशेषज्ञों की मानें तो उत्तर-पश्चिम की बर्फीली हवाओं ने झारखंड की ओर अपना रुख कर लिया है। हिमालय से टकराकर आने वाली इन सर्द हवाओं की वजह से तापमान में 3 से 4 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। जब सूरज बादलों के पीछे छिपा रहता है और आसमान साफ़ होने के बजाय हल्का धुंधला रहता है, तो ठिठुरन बढ़ना लाजमी है। रांची का न्यूनतम तापमान तो पहले ही 8 डिग्री के नीचे जाने को बेताब दिख रहा है।

सावधानी ही आपकी ढाल है
देखिये, ये सिर्फ़ एक ख़बर नहीं है, बल्कि आपके और आपके परिवार के लिए एक अलर्ट है।

  1. बुजुर्गों और बच्चों का ध्यान रखें: इस कड़ाके की सर्दी में सबसे ज़्यादा असर उन्हें ही होता है।
  2. सही खान-पान: गुनगुना पानी और हल्का गर्म खाना ही शरीर को भीतर से ताकत देगा।
  3. मॉर्निंग वॉक पर ब्रेक: जो लोग बहुत जल्दी सुबह टहलने के शौकीन हैं, वे कोहरा और गलन रहने तक थोड़ा इंतज़ार करें।

आने वाले 48 से 72 घंटों में कनकनी और बढ़ने के आसार हैं। पलामू और कोल्हान प्रमंडल के जिलों में 'कोल्ड वेव' (Cold Wave) के जैसे हालात बन सकते हैं। इसलिए हमारी तो यही सलाह है कि अगर काम बहुत ज़रूरी न हो, तो सर्द रातों में सफर करने से बचें। झारखंड की ये हवा अब स़िर्फ बह नहीं रही, बल्कि कांपने पर मजबूर कर रही है।

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