बैज़बॉल, कड़वे सवाल और कोच की झुंझलाहट इंग्लैंड क्रिकेट में आखिर ये क्या चल रहा है?
News India Live, Digital Desk: क्रिकेट के मैदान पर जब नतीजे पक्ष में नहीं आते, तो सबसे पहले उंगलियां टीम की 'फिलॉसफी' या रणनीति पर उठती हैं। इंग्लैंड की टेस्ट टीम के साथ भी आजकल कुछ ऐसा ही हो रहा है। कोच ब्रेंडन मैकुलम, जिन्होंने 'बैज़बॉल' (Bazball) के जरिए टेस्ट क्रिकेट देखने का नज़रिया ही बदल दिया था, अब खुद अपने पुराने कप्तान नासिर हुसैन के निशाने पर आ गए हैं।
हुआ क्या, जो बात यहाँ तक बढ़ी?
बात शुरू हुई हार से। जब हार के बाद सवाल पूछे जाते हैं, तो कई बार कड़वे लगते हैं। पूर्व कप्तान और कमेंटेटर नासिर हुसैन ने जब मैकुलम से पूछा कि "क्या आप वाकई ये समझने को तैयार हैं कि टीम को कहाँ बदलने की ज़रूरत है?", तो मैकुलम थोड़ा उखड़ (bristles) गए। उन्हें शायद नासिर का अंदाज़ पसंद नहीं आया या फिर सवाल थोड़ा ज़्यादा चुभ गया। लेकिन असल मज़ा तो तब आया जब इस प्रतिक्रिया के बावजूद नासिर हुसैन पीछे नहीं हटे और अपनी बात पर अड़े रहे।
जिद बनाम सुधार की गुंजाइश
मैकुलम का मानना है कि वे 'सत्य' (Dogmatic) होने के पक्ष में नहीं हैं, यानी वो आँख मूंदकर किसी एक ही रास्ते पर नहीं चलना चाहते। लेकिन नासिर हुसैन का तर्क कुछ और है। नासिर का कहना है कि सिर्फ कहने से कुछ नहीं होगा, अगर आप एक ही तरह की गलतियां बार-बार दोहरा रहे हैं और फिर भी इसे आक्रामकता का नाम दे रहे हैं, तो सवाल तो उठेंगे। नासिर हुसैन ने साफ़ कहा कि किसी भी सिस्टम या खेलने के तरीके को लगातार 'अपग्रेड' करना पड़ता है, और मैकुलम को यह बात सुननी ही होगी।
हार की निराशा और दिग्गज का आईना
हम अक्सर देखते हैं कि जब कोच या कप्तान अपनी टीम के साथ बहुत ज़्यादा गहराई से जुड़े होते हैं, तो बाहरी आलोचना उन्हें व्यक्तिगत चोट की तरह लगती है। मैकुलम के साथ भी यही हो रहा है। लेकिन नासिर हुसैन जैसे दिग्गज का आईना दिखाना ज़रूरी है। क्रिकेट प्रेमियों के बीच भी अब यह बहस तेज़ है क्या बैज़बॉल अब एक घिसा-पिटा फॉर्मूला बन गया है? या इंग्लैंड के खिलाड़ी आक्रामकता और मूर्खता के बीच की बारीक़ लकीर को नहीं समझ पा रहे हैं?