Balochistan Civil War : बलूचिस्तान में मची तबाही 24 घंटे में 50 से ज्यादा हमले, पाकिस्तानी सेना के उड़े होश इंटरनेट बंद
News India Live, Digital Desk: पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत बलूचिस्तान इस वक्त 'कब्रिस्तान' में तब्दील होता नजर आ रहा है। अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने 'ऑपरेशन हेरोफ़' के तहत पूरे प्रांत में एक साथ भीषण हमले शुरू कर दिए हैं। महज एक दिन के भीतर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, पुलिस चौकियों और बुनियादी ढांचों पर 50 से अधिक हमले किए गए हैं। इन हमलों की तीव्रता इतनी अधिक है कि पाकिस्तानी सेना को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, पूरे प्रांत में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी गई हैं ताकि विद्रोहियों के बीच समन्वय को तोड़ा जा सके।
पाकिस्तानी सेना बेबस: 'ऑपरेशन हेरोफ़' ने बढ़ाई मुश्किलें
BLA के मजीद ब्रिगेड और फतेह स्क्वाड ने इस बार अपनी रणनीति बदल दी है। उन्होंने न केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, बल्कि प्रमुख राजमार्गों को भी अपने नियंत्रण में ले लिया है।
सड़कों पर कत्लेआम: मुसाखेल इलाके में विद्रोहियों ने ट्रकों और बसों को रोककर पहचान पत्र चेक किए और पंजाब प्रांत से ताल्लुक रखने वाले कम से कम 23 नागरिकों को गोली मार दी।
रेलवे लिंक ध्वस्त: बलूचिस्तान को सिंध और पंजाब से जोड़ने वाले रणनीतिक बोलान रेलवे पुल को आईईडी (IED) विस्फोट से उड़ा दिया गया है, जिससे ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है।
छावनियों पर कब्जा: विद्रोहियों का दावा है कि उन्होंने बेला और ग्वादर के पास कई सैन्य चौकियों को अपने कब्जे में ले लिया है।
सड़कों पर लाशें और धुआं: इंटरनेट शटडाउन से बढ़ा सस्पेंस
बलूचिस्तान से आने वाली तस्वीरें और वीडियो (जो शटडाउन से पहले लीक हुए) दिल दहला देने वाले हैं। कई जगहों पर जलते हुए वाहन और पाकिस्तानी सैनिकों के शव सड़कों पर बिखरे देखे गए हैं।
सूचना का ब्लैकआउट: पाकिस्तान सरकार ने पूरे प्रांत में सूचनाओं के प्रवाह को रोकने के लिए 'डिजिटल आयरन कर्टन' लगा दिया है।
चीन की चिंता: ये हमले विशेष रूप से उन इलाकों में हुए हैं जहाँ चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की परियोजनाएं चल रही हैं। ग्वादर पोर्ट के आसपास सुरक्षा को 'हाई अलर्ट' पर रखा गया है।
पाकिस्तान सरकार का पक्ष: "हम चुन-चुन कर बदला लेंगे"
पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने इस स्थिति पर आपातकालीन बैठक की है। सरकार का दावा है कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई में 12 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि सेना को कई इलाकों से पीछे हटना पड़ा है। "यह पाकिस्तान की संप्रभुता पर हमला है। हम बलूचिस्तान में अराजकता फैलाने वालों को किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।" शहबाज शरीफ, प्रधानमंत्री पाकिस्तान
विद्रोह की जड़: दशकों पुराना आक्रोश
बलूचिस्तान में यह उबाल अचानक नहीं आया है। बलूच नागरिक लंबे समय से संसाधनों की लूट, सेना द्वारा 'जबरन गायब' किए गए लोगों (Enforced Disappearances) और मानवाधिकारों के उल्लंघन का विरोध कर रहे हैं। अब यह आंदोलन एक पूर्ण नागरिक युद्ध (Civil War) की शक्ल ले चुका है।