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April 12 2026 03:00 pm

बाबा बागेश्वर का छत्तीसगढ़ दौरा भक्ति के बीच जब प्रोटोकॉल टूटा, तो शुरू हुई सियासी बयानबाज़ी

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News India Live, Digital Desk : छत्तीसगढ़ में इन दिनों चर्चा के केंद्र में एक ही नाम है पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जिन्हें दुनिया बाबा बागेश्वर के नाम से जानती है। उनके किसी भी कार्यक्रम में हज़ारों की भीड़ जुटना अब कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार उनका छत्तीसगढ़ आना सिर्फ़ उनकी बातों की वजह से नहीं, बल्कि दो तस्वीरों की वजह से विवादों में आ गया है।

सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक दो बातें सबसे ज़्यादा पूछी जा रही हैं: पहली ये कि क्या एक धार्मिक गुरु के लिए सरकारी विमान (State Plane) का इस्तेमाल सही है? और दूसरी, क्या ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस अधिकारी को वर्दी में किसी के पैर छूने चाहिए?

एक विमान और उठते सवाल
छत्तीसगढ़ सरकार के सरकारी विमान से बाबा बागेश्वर का रायगढ़ पहुँचना कई लोगों को हैरान कर गया। राजनीति में इसे स़िर्फ एक गुरु का सम्मान नहीं माना जा रहा है, बल्कि विपक्षी दल और कई सामाजिक कार्यकर्ता इसे 'सरकारी संसाधनों' के गलत इस्तेमाल के रूप में देख रहे हैं। चर्चा है कि जब राज्य की मशीनरी और पैसा आम जनता की सहूलियत के लिए होता है, तो उसका उपयोग एक निजी धार्मिक यात्रा के लिए कितना जायज़ है। हालांकि, सरकार की तरफ से अपने तर्क हो सकते हैं, लेकिन आम जनता के बीच इस पर सुगबुगाहट तेज़ है।

वर्दी का अनुशासन और निजी आस्था
लेकिन असली विवाद उस वीडियो के बाद बढ़ा, जिसमें एक वर्दीधारी पुलिस अधिकारी बाबा के पैर छूते नज़र आ रहे हैं। हम सभी जानते हैं कि भारत में संतों का सम्मान हमारी संस्कृति का हिस्सा है, लेकिन जब कोई व्यक्ति वर्दी (Uniform) में होता है, तो वह सिर्फ़ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि शासन और कानून का चेहरा होता है।

प्रोटोकॉल की मानें तो वर्दी में किसी धार्मिक गुरु या नेता के पैर छूना अनुशासन के दायरे से बाहर माना जाता है। आलोचकों का कहना है कि पुलिस का काम सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना है, न कि सरेआम अपनी निजी आस्था का प्रदर्शन करना। वहीं, बाबा के समर्थकों का तर्क है कि 'आस्था नियमों से बड़ी होती है'। लेकिन एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति के लिए ये संतुलन बनाए रखना मुश्किल काम है।

बढ़ती राजनीतिक तपिश
छत्तीसगढ़ की सियासत में इस घटना ने एक नया मुद्दा दे दिया है। सत्ता पक्ष इसे सम्मान के तौर पर देख रहा है, जबकि विपक्ष इसे अनुशासनहीनता और सरकारी रसूख का दिखावा बता रहा है। छत्तीसगढ़ जैसे शांत प्रदेश में इस तरह के धार्मिक-राजनीतिक मेलजोल अक्सर चर्चा का विषय बनते रहे हैं।

निष्कर्ष की बात
धर्म और राजनीति के इस संगम में सबसे ज़्यादा मुश्किल उन नियमों की होती है, जो निष्पक्षता बनाए रखने के लिए बनाए गए हैं। बाबा बागेश्वर के प्रति करोड़ों की आस्था है, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन क्या सरकारी तंत्र और नियम उस आस्था के आगे मौन रह सकते हैं? ये वो सवाल है जो इस घटना ने सबके मन में छोड़ दिया है।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होने के बाद, अब विभाग क्या कार्रवाई करेगा, ये देखना बाकी है। फिलहाल तो छत्तीसगढ़ की फिज़ाओं में 'भक्ति और नियम' की इस टक्कर की गूँज बनी हुई है।