B.Tech AI Update : अब NIT में भी होगी AI की धमाकेदार एंट्री नए सत्र से छात्र पढ़ेंगे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के फंडामेंटल कोर्स
News India Live, Digital Desk : इंजीनियरिंग की दुनिया में कदम रखने वाले छात्रों के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) पटना समेत कई प्रमुख एनआईटी संस्थानों ने अपने पाठ्यक्रम (Curriculum) में क्रांतिकारी बदलाव का फैसला किया है। नए शैक्षणिक सत्र (2026-27) से बीटेक के छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के फंडामेंटल कोर्स पढ़ाए जाएंगे। यह पहल छात्रों को भविष्य की नौकरियों और उभरती हुई टेक्नोलॉजी के लिए तैयार करने के उद्देश्य से की गई है।
किन छात्रों को मिलेगा इसका लाभ? (Who can Benefit?)
पहले यह माना जाता था कि AI केवल कंप्यूटर साइंस के छात्रों के लिए है, लेकिन अब NIT ने इस धारणा को बदल दिया है। नए सत्र से:
कोर ब्रांच का आधुनिकरण: कंप्यूटर साइंस के साथ-साथ सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्रों को भी AI के बुनियादी पाठ्यक्रम अनिवार्य रूप से पढ़ने होंगे।
मल्टी-डिस्प्लीनरी अप्रोच: इंजीनियरिंग की हर शाखा में AI के बढ़ते उपयोग को देखते हुए इसे 'फंडामेंटल कोर्स' के रूप में जोड़ा गया है।
पाठ्यक्रम में क्या होगा खास? (Key Course Highlights)
छात्रों को शुरुआती सेमेस्टर में ही AI की बारीकियां सिखाई जाएंगी। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित विषय शामिल होंगे:
AI के सिद्धांत (Principles of AI): कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इतिहास और इसके बुनियादी कार्य।
मशीन लर्निंग (Machine Learning Basics): डेटा के जरिए मशीनों को सिखाने की तकनीक।
डेटा साइंस (Data Science Fundamentals): इंजीनियरिंग समस्याओं को हल करने के लिए डेटा का विश्लेषण।
एथिक्स और एआई (Ethics in AI): टेक्नोलॉजी के नैतिक पक्ष और डेटा सुरक्षा की जानकारी।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
वर्तमान में टेक इंडस्ट्री में ChatGPT, Generative AI और स्वचालन (Automation) की मांग तेजी से बढ़ी है। NIT का मानना है कि यदि एक सिविल इंजीनियर को AI का ज्ञान होगा, तो वह स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और स्ट्रक्चरल डिजाइनिंग में बेहतर प्रदर्शन कर सकेगा। इसी तरह, मैकेनिकल इंजीनियर रोबोटिक्स और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग में इस ज्ञान का उपयोग कर पाएंगे।
प्लेसमेंट पर पड़ेगा सकारात्मक असर
विशेषज्ञों का कहना है कि बीटेक के शुरुआती सालों में ही AI पढ़ने से छात्रों की 'लॉजिकल थिंकिंग' विकसित होगी। इससे कैंपस प्लेसमेंट के दौरान छात्रों को बड़ी टेक कंपनियों (जैसे Google, Microsoft, और NVIDIA) में बेहतर पैकेज मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।