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April 17 2026 09:18 pm

यूपी पुलिस का मिशन घर वापसी 15 दिनों में 88,000 से अधिक गुमशुदा लोगों को किया ट्रेस

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News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश में लापता लोगों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की तलाश के लिए चलाए गए विशेष अभियान ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 15 दिनों में प्रदेश भर से 88,022 गुमशुदा व्यक्तियों को डिजिटल रिकॉर्ड (CCTNS) पर ट्रेस कर लिया गया है।

अभियान के मुख्य आंकड़े (Data Insights)

विवरणसंख्या / आंकड़े
कुल दर्ज गुमशुदगी (01 Jan 2024 - 18 Jan 2026)1,08,372
विशेष अभियान में 'ट्रेस' किए गए लोग88,022
रिकवरी प्रतिशत (Recovery Rate)81.22%

क्यों और कैसे हुआ यह बदलाव?

इस भारी सफलता के पीछे पुलिस की कार्यशैली में आए कुछ बड़े बदलाव और न्यायिक दबाव शामिल हैं:

हाईकोर्ट का कड़ा रुख: फरवरी की शुरुआत में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई थी कि 1.08 लाख लापता लोगों में से पुलिस ने केवल 9,700 लोगों पर ही कार्रवाई की। कोर्ट ने इसे अधिकारियों का "लापरवाह रवैया" बताया था।

CCTNS डेटा अपडेट: डीजीपी राजीव कृष्ण ने पाया कि बड़ी संख्या में लोग वास्तव में अपने घर लौट चुके थे, लेकिन पुलिस के डिजिटल रिकॉर्ड (CCTNS) अपडेट न होने के कारण वे कागजों पर अभी भी 'लापता' दिख रहे थे।

ग्राउंड वेरिफिकेशन: हर जिले और थाने में विशेष टीमें गठित की गई थीं। इन टीमों ने लापता लोगों के घरों पर जाकर सीधा संपर्क किया और पाया कि कई लोग खुद लौट आए थे, लेकिन परिजनों ने पुलिस को सूचना नहीं दी थी।

भविष्य की रणनीति: 'यक्ष ऐप' और 'मिशन वात्सल्य'

डीजीपी ने भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए 14 फरवरी 2026 को एक नया सर्कुलर जारी किया है:

यक्ष ऐप (Yaksh App): बीट स्तर के सिपाहियों को उनके मोबाइल पर इस ऐप के जरिए गुमशुदा लोगों की रीयल-टाइम जानकारी मिलेगी।

मिशन वात्सल्य: लापता बच्चों का पूरा विवरण अब अनिवार्य रूप से केंद्र सरकार के 'मिशन वात्सल्य पोर्टल' पर अपलोड किया जाएगा।

AHTC का दखल: यदि जांच में मानव तस्करी या किसी संगठित गिरोह का हाथ पाया जाता है, तो मामला तुरंत 'एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट' को सौंपा जाएगा।