आजम खान का परिवार और जन्म प्रमाण पत्र का मामला: अब सुप्रीम कोर्ट ने मांगा यूपी सरकार से जवाब

Post

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान और उनके परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। फर्जी जन्म प्रमाण पत्र से जुड़ा मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत, यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इस मामले में आजम खान, उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम को निचली अदालत से सात-सात साल की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।

अब इसी फैसले के खिलाफ खान परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक नोटिस जारी किया है और इस पूरे मामले पर जवाब मांगा है।

क्या है यह पूरा मामला?

यह मामला अब्दुल्ला आजम के दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्रों से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि उनके दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाए गए, एक रामपुर से और दूसरा लखनऊ से, जिनमें जन्म की तारीखें अलग-अलग थीं। इसका मकसद चुनाव लड़ने के लिए उम्र को सही साबित करना था।

2019 में, भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि खान परिवार ने धोखाधड़ी करके ये प्रमाण पत्र हासिल किए। रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने पिछले साल अक्टूबर में तीनों को दोषी मानते हुए सात साल की जेल की सजा सुनाई थी।

सजा के बाद अब्दुल्ला आजम की विधायकी भी रद्द कर दी गई थी। परिवार ने इस फैसले को ऊपरी अदालतों में चुनौती दी, लेकिन उन्हें वहां से भी कोई राहत नहीं मिली।

अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे हफ्ते में करेगा। खान परिवार को उम्मीद है कि शायद सबसे बड़ी अदालत से उन्हें कोई राहत मिल जाए, जबकि यूपी सरकार को अपना पक्ष मजबूती से रखना होगा। इस फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यह आजम खान के परिवार का राजनीतिक भविष्य तय कर सकता है।