Attacks on Hindus : सिर्फ एक मकान नहीं जला, इंसानियत जल गई बांग्लादेश में फिर एक गुरु का घर बना राख

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News India Live, Digital Desk: अक्सर हम कहते हैं कि समाज में शिक्षक का दर्जा सबसे ऊपर होता है। एक टीचर ही होता है जो बिना किसी भेदभाव के बच्चों का भविष्य संवारता है। लेकिन जरा सोचिए, जिस समाज को वो गढ़ रहा है, अगर वही समाज उसके घर को आग के हवाले कर दे तो उस इंसान पर क्या बीतेगी?

हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश से एक बार फिर ऐसी ही बेचैन करने वाली खबर सामने आई है। वहां के हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे और इस बार नफरत की आग ने एक हिंदू शिक्षक के आशियाने को अपना शिकार बनाया है।

रात के अंधेरे में खौफनाक मंजर

यह सिर्फ एक घर जलने की घटना नहीं है, यह भरोसे के टूटने की बात है। खबर के मुताबिक, एक हिंदू शिक्षक अपने परिवार के साथ चैन से रह रहे थे, उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि उनकी पहचान या उनका धर्म उनके लिए मुसीबत बन जाएगा। उपद्रवियों ने घर को निशाना बनाया और देखते ही देखते सब कुछ धू-धू कर जल उठा।

जरा उस परिवार की मानसिक स्थिति के बारे में सोचिए। मेहनत से बनाया गया घर, यादें और सुरक्षा का अहसास—सब कुछ पलों में राख हो गया। गनीमत रही कि जान का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन जो डर उनके मन में बैठ गया है, क्या वो कभी निकल पाएगा?

क्यों नहीं थम रहा है अल्पसंख्यकों पर यह कहर?

बांग्लादेश में पिछले कुछ समय से जो राजनीतिक उथल-पुथल मची है, उसका सबसे ज्यादा खमियाजा वहां के अल्पसंख्यक (Minorities) भुगत रहे हैं। चाहे वो मंदिर हो, दुकान हो या अब किसी का निजी घर हिंसा करने वाले कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे।

एक आम इंसान के तौर पर यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर गलती किसकी है? एक टीचर, जिसका काम सिर्फ ज्ञान बांटना है, उसे राजनीति या नफरत का शिकार क्यों बनाया जा रहा है? आए दिन ऐसी खबरें आती हैं और फिर दब जाती हैं, लेकिन वहां रहने वाले हिंदू परिवारों के लिए हर रात एक कयामत की तरह होती है।

डर के साये में जिंदगी

यह घटना एक चेतावनी भी है और एक कड़वा सच भी। यह दिखाती है कि भीड़ जब पागल हो जाती है, तो उसे अच्छे-बुरे की पहचान नहीं रहती। फिलहाल वहां के अल्पसंख्यक डरे हुए हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि जिस देश में वो पीढ़ियों से रह रहे हैं, क्या वो अब उनका अपना है भी या नहीं।

हमें उम्मीद करनी चाहिए कि हालात जल्द सुधरें और उस शिक्षक को न्याय मिले। क्योंकि अगर समाज में 'गुरु' ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो हम किस उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद कर सकते हैं?