बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती घोटाला BSUSC ने नहीं निकाला विज्ञापन, फिर भी कैसे हुई हजारों भर्तियां?
News India Live, Digital Desk: बिहार में यूनिवर्सिटी प्रोफेसर बनने का सपना देखने वाले छात्रों के लिए एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर है. यहां असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां बिहार स्टेट यूनिवर्सिटी सर्विस कमीशन (BSUSC) ने रिक्त पदों के लिए कोई विज्ञापन ही जारी नहीं किया, फिर भी सैकड़ों शिक्षकों की नियुक्तियां हो गईं. यह अपने आप में एक गंभीर सवाल है कि जब कोई वैकेंसी निकली ही नहीं थी, तो लोगों को कैसे नियुक्त कर दिया गया!
कहां से हुई अनियमितताओं की शुरुआत?
दरअसल, विश्वविद्यालय सेवा आयोग यानी BSUSC का काम ही है असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे पदों के लिए विज्ञापन निकालना, आवेदन लेना और फिर योग्यता के आधार पर भर्ती करना. लेकिन खबर है कि आयोग ने बिना किसी विज्ञापन के, नियम-कानून ताक पर रखकर भर्तियां कर दीं. यह बताता है कि नियुक्ति प्रक्रिया में भारी अनियमितता बरती गई और पारदर्शिता का बिलकुल भी ध्यान नहीं रखा गया. ऐसा लगता है कि पर्दे के पीछे से बड़े पैमाने पर कुछ हुआ है, जिसकी वजह से ये भर्तियां सवालों के घेरे में आ गई हैं.
क्या यह सिर्फ बिहार की कहानी है?
अकेले BSUSC ही नहीं, बिहार के कई विश्वविद्यालयों में शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की बहाली में ऐसी गड़बड़ियाँ पहले भी सामने आती रही हैं. ये अनियमितताएं कई तरह की होती हैं – जैसे योग्यता पूरी न होने पर भी नियुक्ति देना, या फिर निर्धारित प्रक्रिया का पालन न करना. हालिया खुलासा बताता है कि अब असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी नियमों को दरकिनार किया जा रहा है.
यह मामला दिखाता है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए अभी बहुत कुछ करने की ज़रूरत है. अगर ऐसे ही नियम-कायदों को तोड़ा जाता रहा, तो उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ सकता है, और सबसे बड़ी चोट उन मेहनती और योग्य उम्मीदवारों पर पड़ेगी जो नियमों का पालन करते हुए परीक्षा पास करने की उम्मीद लगाए बैठे हैं. यह भी चिंता का विषय है कि जब आयोग खुद ऐसे घोटालों में लिप्त पाया जाता है, तो इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठना लाजिमी है. उम्मीद है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोका जा सके.