Ashtanga Hridaya Health : बीमारियां मौसम से नहीं लाइफस्टाइल से आती हैं, जानें सेहतमंद रहने की प्राचीन विधि

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News India Live, Digital Desk: बदलते मौसम ने बीमार कर दिया है" यह जुमला हम अक्सर सुनते हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि एक ही घर में रहने वाले दो लोगों पर मौसम का असर अलग-अलग क्यों होता है? असल में, बीमारियां बाहर के मौसम से नहीं, बल्कि हमारे शरीर के भीतर छिपी कमजोरियों और 'खराब लाइफस्टाइल' की वजह से पनपती हैं।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम बीमारी के लक्षणों का इलाज दवाइयों से तो करते हैं, लेकिन उसकी 'जड़' पर काम नहीं करते। आयुर्वेद के महान ग्रंथ 'अष्टांग हृदय' में स्वस्थ रहने के जो सिद्धांत बताए गए हैं, वे किसी दवा के बारे में नहीं बल्कि जीवन जीने की कला सिखाते हैं। आइए जानते हैं अष्टांग योग के अनुसार कैसी होनी चाहिए आपकी आदर्श दिनचर्या।

1. ब्रह्म मुहूर्त: सूर्योदय से पहले जागने का विज्ञान

स्वस्थ शरीर की पहली शर्त व्यायाम या महंगी दवाएं नहीं, बल्कि सही समय पर जागना है। प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने के लिए सूर्योदय से पहले उठना सबसे लाभकारी माना गया है।

उषापान: सुबह उठते ही सबसे पहले हल्का गुनगुना पानी पीएं। यह रात भर शरीर में जमा हुए विषाक्त पदार्थों (Toxins) को बाहर निकालने में मदद करता है।

फायदा: गुनगुना पानी पेट की पाचन अग्नि को प्रज्वलित करता है, जिससे न केवल भूख अच्छी लगती है बल्कि हार्मोनल संतुलन भी बना रहता है।

2. मुख और जिह्वा की सफाई: पेट की सेहत का द्वार

आयुर्वेद के अनुसार, हमारे मुंह का सीधा संबंध पेट से है। जीभ पर जमी सफेद परत असल में शरीर की गंदगी का संकेत है।

सफाई: सिर्फ दांत साफ करना काफी नहीं है, जीभ (Tongue) की सफाई भी अनिवार्य है। कीटाणु अगर मुंह में रहेंगे, तो वे भोजन के साथ पेट में जाकर रोगों को जन्म देंगे।

ऑयल पुलिंग (Oil Pulling): मुंह की गहराई से सफाई और दांतों की मजबूती के लिए तेल के कुल्ले करना (ऑयल पुलिंग) बहुत फायदेमंद है। यह दांतों के पीलेपन को दूर कर मसूड़ों को स्वस्थ रखता है।

3. व्यायाम: थकान नहीं, नई ऊर्जा का संचार

व्यायाम का अर्थ शरीर को तोड़ना नहीं, बल्कि उसे सक्रिय करना है। भोजन करने से पहले हल्का व्यायाम या योगासन शरीर के हर अंग तक ऑक्सीजन और रक्त का संचार बढ़ाते हैं। इससे शरीर में जमा आलस्य दूर होता है और आप दिन भर ऊर्जावान महसूस करते हैं।

4. आहार ही औषधि है (Food as Medicine)

अष्टांग हृदय का मूल मंत्र है कि अपने भोजन को औषधि की तरह लें।

पानी का नियम: प्यास लगने पर पर्याप्त पानी पीएं, लेकिन भोजन के तुरंत बाद पानी पीने से बचें ताकि पाचन अग्नि मंद न हो।

संतुलित आहार: जैसा अन्न, वैसा मन। सात्विक और ताजा भोजन शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है।