हनुमान जी के मंदिर में राम नाम जपते वक्त कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती? आज ही जान लें सही नियम

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News India Live, Digital Desk : जय सिया राम और जय बजरंगबली दोस्तों! हम सब जानते हैं कि अगर इस कलियुग में कोई देवता सबसे जल्दी अपने भक्तों की पुकार सुनते हैं, तो वो हमारे हनुमान जी (Hanuman Ji) हैं। और यह भी हम सब जानते हैं कि हनुमान जी को खुश करने का सबसे बड़ा 'पासवर्ड' क्या है? वो है"राम नाम"

अक्सर जब हम परेशान होते हैं या मन की शांति के लिए मंदिर जाते हैं, तो वहां बैठकर राम नाम का जाप या कीर्तन करने लगते हैं। यह बहुत अच्छी बात है, क्योंकि जहां राम का नाम होता है, वहां हनुमान जी दौड़े चले आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मंदिर में बैठकर कीर्तन या जप करने के भी कुछ नियम और मर्यादाएं होती हैं?

अनजाने में हम भक्ति के भाव में कुछ ऐसी छोटी-मोटी गलतियां कर बैठते हैं जिससे हमें वो फल नहीं मिल पाता जिसकी हमें चाहत होती है। आइये, एक दोस्त और भक्त की तरह समझते हैं कि हनुमान जी के सामने बैठकर राम जी को याद करते वक्त हमें किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

1. शोर नहीं, 'भाव' जरूरी है
कई बार हम देखते हैं कि लोग मंदिर में बहुत ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाकर भजन गाते हैं। याद रखिये, हनुमान जी राम भक्त हैं, और राम जी का स्वभाव 'शांत' और 'मर्यादा' वाला है। जब आप कीर्तन करें, तो कोशिश करें कि आपकी आवाज़ में मिठास हो और भाव गहरा हो। ज़रूरी नहीं कि आप बहुत तेज गाएं, ज़रूरी ये है कि आपका मन राम जी के चरणों में हो। इतना शोर न करें कि पास बैठे दूसरे भक्त के ध्यान में बाधा पड़े।

2. दिखावे से बचें, मोबाइल दूर रखें
आजकल एक नई आदत लग गई है भक्ति कम और सेल्फी ज्यादा। अगर आप मंदिर में कीर्तन करने बैठे हैं, तो कृपया अपना फ़ोन साइलेंट कर दें या जेब के अंदर रखें। हनुमान जी को वो भक्त पसंद हैं जो दुनिया को भूलकर राम में रम जाते हैं, न कि वो जो कीर्तन के बीच में व्हट्सएप्प चेक करते हैं। आपका पूरा फोकस प्रभु की मूर्ति और उनके नाम पर होना चाहिए।

3. सिर्फ 'राम' नहीं, 'सीता-राम' कहें
शास्त्रों के जानकार और बुजुर्ग कहते हैं कि हनुमान जी को तब सबसे ज्यादा खुशी होती है जब आप राम जी के साथ माता सीता का भी नाम लेते हैं। अकेले राम नाम से ज्यादा प्रभावशाली "सीता-राम" या "जय सिया राम" का कीर्तन माना जाता है। इससे हनुमान जी गदगद हो जाते हैं क्योंकि उनके लिए माता सीता का स्थान पूजनीय है।

4. साफ मन और पवित्रता
मंदिर जाने से पहले शारीरिक सफाई (स्नान) तो हम करते ही हैं, लेकिन मानसिक सफाई भी जरूरी है। कीर्तन करते समय किसी के लिए भी दिल में बुराई, जलन या गुस्सा न रखें। हनुमान जी उस भक्त की पुकार कभी अनसुनी नहीं करते जिसका मन बच्चे जैसा साफ़ होता है।

5. कीर्तन के बाद भोग और दीया
जब आपका कीर्तन या जाप पूरा हो जाए, तो खाली हाथ न उठें। अपनी श्रद्धा अनुसार हनुमान जी को गुड़-चने, लड्डू या सिर्फ तुलसी दल का भोग लगाएं और मुमकिन हो तो चमेली के तेल या घी का दीपक जरूर जलाएं। इससे आपकी पूजा पूरी मानी जाती है।