पीलीभीत के जंगलों में चल रही निसर्ग और छोटे हाथी की अनोखी दोस्ती की कोशिश
News India Live, Digital Desk: इंसानी दुनिया की तरह जानवरों की दुनिया में भी अकेलापन बहुत दुखदाई होता है। सोचिए ज़रा, जंगल का वो छोटा सा बच्चा जो अपनी माँ को खो चुका है और पूरी तरह अकेला पड़ गया है, उसे सुरक्षा और ममता की कितनी ज़रूरत होगी? पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगलों में पिछले कुछ समय से वन विभाग की टीम एक बहुत ही संवेदनशील काम में जुटी है। वह कोशिश कर रही है कि एक अनाथ नन्हे हाथी का परिचय 'निसर्ग' नाम के एक विशाल हाथी से कराया जाए।
कौन है 'निसर्ग' और क्यों उसे ही चुना गया?
निसर्ग एक प्रशिक्षित (Trained) टस्कर है, जिसे कर्नाटक से लाया गया है। वह अनुभवी है, समझदार है और उसका स्वभाव शांत बताया जाता है। अक्सर बड़े नर हाथी बच्चों को संरक्षण देने में हिचकिचाते हैं, लेकिन वन विभाग का मानना है कि निसर्ग इस अनाथ बच्चे के लिए एक संरक्षक यानी गार्डियन की भूमिका निभा सकता है। यदि यह नन्हा बच्चा निसर्ग के साथ तालमेल बिठा लेता है, तो उसे न केवल सुरक्षा मिलेगी, बल्कि जंगल की मुश्किल राहों में एक बड़ा सहारा भी मिल जाएगा।
दोस्ती कराने की है अनोखी प्रक्रिया
यह सब इतना आसान नहीं है कि दो हाथियों को पास लाकर छोड़ दिया जाए। वन विभाग के अधिकारी और महावत इस पर दिन-रात नज़र रख रहे हैं। दोनों को एक-दूसरे के नज़दीक धीरे-धीरे लाया जा रहा है ताकि उनके बीच एक स्वाभाविक खिंचाव और भरोसा पैदा हो सके। अधिकारी कोशिश कर रहे हैं कि निसर्ग इस छोटे बच्चे को अपना ले और उसे अपने सुरक्षा घेरे में ले ले। अगर यह मेल कामयाब रहा, तो यह वन्यजीव संरक्षण (Wildlife Conservation) की दुनिया में एक बड़ी मिसाल होगा।
अकेलेपन से निकल पाएगा छोटा हाथी?
जंगल में अपनी माँ के बिना हाथी के बच्चे का ज़िंदा रहना बहुत मुश्किल होता है। अन्य जानवर और खुद अकेलापन उसे कमजोर बना सकते हैं। इसीलिए यूपी वन विभाग का यह कदम बेहद मानवीय और ज़रूरी है। वन विभाग के विशेषज्ञ दोनों की बॉडी लैंग्वेज को बारीकी से पढ़ रहे हैं।
इस कहानी में जो सबसे अच्छी बात है, वो है इंसानी कोशिश—जो केवल ड्यूटी नहीं कर रहे, बल्कि एक बेज़ुबान की ज़िंदगी को संवारने का प्रयास कर रहे हैं। आने वाले कुछ दिन इन दोनों के रिश्ते के लिए बहुत अहम होंगे। दुआ कीजिये कि इस छोटे हाथी को निसर्ग के रूप में एक मजबूत और स्नेही संरक्षक मिल जाए।