अमेरिका के सबसे बड़े शहर में डर का माहौल? न्यूयॉर्क की सड़कों पर जब सरेआम गूंजे हमास के नारे

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News India Live, Digital Desk : दुनिया के सबसे मशहूर शहर न्यूयॉर्क (New York City) से एक ऐसी खबर आ रही है, जिसने वहां की शांति को हिलाकर रख दिया है। शहर के क्वींस (Queens) इलाके में, जहां बड़ी संख्या में यहूदी समुदाय के लोग रहते हैं, वहां कुछ ऐसा हुआ जिसकी उम्मीद शायद किसी ने नहीं की थी। विरोध प्रदर्शनों के दौरान भीड़ ने खुलेआम हमास (Hamas) के समर्थन में नारे लगाए।

सोचिए, जिस अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ दुनिया में सबसे बड़ी जंग छेड़ी हो, उसी की सड़कों पर अगर लोग चिल्लाकर कहें"जोर से बोलो, हम हमास के साथ हैं," तो वहां के आम नागरिकों पर क्या गुजर रही होगी?

मेयर ममदानी के लिए ‘कांटों भरा ताज’

इस पूरी घटना के केंद्र में अब न्यूयॉर्क के मेयर, जोहरान ममदानी (Zohran Mamdani) आ गए हैं। ममदानी के लिए यह वक्त किसी सियासी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। क्यों? क्योंकि ममदानी खुद लंबे समय से 'सोशलिस्ट' विचारधारा के रहे हैं और उन्होंने कई बार फलस्तीन के हक की आवाज उठाई है।

लेकिन, 'फलस्तीन का समर्थन करना' और 'हमास जैसे प्रतिबंधित संगठन के नारे लगने देना'—इन दोनों में जमीन-आसमान का फर्क है। अब उनके विरोधी और आम जनता सवाल पूछ रही है—"मेयर साहब, क्या शहर में खुलेआम हिंसा और नफरत फैलाने की आजादी दी जाएगी?"

गवर्नर का गुस्सा और मेयर की चुप्पी

मामला तब और गरमा गया जब सोशल मीडिया पर इसके वीडियो वायरल हुए। न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल (Kathy Hochul) ने इसे कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने साफ कहा कि "हिंसा भड़काने वाले ऐसे बयानों के लिए न्यूयॉर्क में कोई जगह नहीं है।" गवर्नर के इतने आक्रामक होने के बावजूद, मेयर ममदानी की तरफ से शुरुआती चुप्पी ने लोगों को और नाराज कर दिया।

हालांकि, बढ़ते दबाव के बाद मेयर ममदानी ने भी बयान जारी किया और कहा कि "आतंकी संगठनों का समर्थन करना हमारे शहर के मूल्यों के खिलाफ है," लेकिन आलोचकों को लग रहा है कि उनकी प्रतिक्रिया थोड़ी देर से और थोड़ी 'नरम' थी।

सड़कों पर पुलिस बनाम जज्बात

उधर पुलिस (NYPD) भी मुश्किल में है। एक तरफ 'अभिव्यक्ति की आजादी' (Free Speech) का कानून है, और दूसरी तरफ नफरती भाषण (Hate Speech) को रोकने की जिम्मेदारी। क्वींस के क्यू गार्डन्स हिल्स इलाके में हुए इस प्रदर्शन में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई, और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया।

आगे क्या होगा?

अब सवाल यह है कि क्या जोहरान ममदानी अपनी छवि बदल पाएंगे? उन्हें एक तरफ अपने कोर वोटर्स (जो फिलिस्तीन समर्थक हैं) को खुश रखना है, और दूसरी तरफ यहूदी समुदाय को सुरक्षा का भरोसा भी दिलाना है। यह संतुलन बनाना आसान नहीं होगा।

सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि यह सिर्फ नारे नहीं हैं, यह शहर के बंटने की निशानी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कितनी सख्ती से पेश आता है। आपकी क्या राय है—क्या ऐसे प्रदर्शनों पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए?