Rajasthan Politics : आज के दौर में सरपंच भी नहीं बन पाते शिवचरण माथुर, कांग्रेस सांसद का अपनी ही राजनीति पर बड़ा प्रहार
News India Live, Digital Desk : राजस्थान की राजनीति में अपनी बेबाकी के लिए मशहूर टोंक-सवाई माधोपुर के कांग्रेस सांसद हरीश मीणा (Harish Meena) ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। जयपुर के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित पूर्व मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर की 100वीं जयंती के कार्यक्रम में मीणा ने वर्तमान राजनीतिक पतन और 'वीआईपी कल्चर' पर जमकर भड़ास निकाली।
"योग्यता नहीं, अब जाति पूछकर मिलते हैं वोट"
पूर्व आईपीएस अधिकारी और सांसद हरीश मीणा ने सादगी और सिद्धांतों की राजनीति को याद करते हुए कहा कि आज का दौर पूरी तरह बदल चुका है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "अगर आज के समय में स्वर्गीय शिवचरण माथुर चुनाव लड़ते, तो वह किसी गांव के सरपंच का चुनाव भी नहीं जीत पाते। आज जनता पहले उम्मीदवार की योग्यता नहीं, बल्कि उसकी जाति और वोटों का गणित पूछती है।"
नेताओं की 'रॉयल लाइफस्टाइल' पर साधा निशाना
मीणा यहीं नहीं रुके, उन्होंने वर्तमान जनप्रतिनिधियों की विलासितापूर्ण जीवनशैली और जनता से बढ़ती दूरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने माथुर साहब के दौर की तुलना आज से करते हुए कहा:
सादगी का अंत: पहले के नेता जनता के बीच साधारण तरीके से रहते थे, लेकिन आज विधायक या सांसद बनते ही आलीशान कोठियां और फार्महाउस खड़े हो जाते हैं।
सुरक्षा का तामझाम: आज किसी नेता के आने से 5 दिन पहले पुलिस का पहरा लग जाता है। सादगी अब केवल भाषणों तक सीमित रह गई है।
पुलिस प्रशासन और सिस्टम की गिरावट पर दर्द
एक पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) के रूप में अपना अनुभव साझा करते हुए हरीश मीणा ने कहा कि प्रशासनिक ढांचे में अब अनुशासन की कमी दिखती है। उन्होंने कहा, "मेरे समय में एक एसपी (SP) की हिम्मत नहीं होती थी कि वह सीधे मुख्यमंत्री से बात कर ले। आज तो सुना जाता है कि थाने का SHO सीधे CM से बात करता है। यह सिस्टम के टूटने का संकेत है।"
कौन थे शिवचरण माथुर? जिनके लिए उमड़ा दर्द
राजस्थान के दो बार मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय शिवचरण माथुर को उनके प्रशासनिक सुधारों (Administrative Reforms) और कड़क अनुशासन के लिए जाना जाता है। उनकी 100वीं जयंती पर आयोजित इस समारोह का विषय भी 'रिफॉर्मिंग गवर्नेंस' रखा गया था। कार्यक्रम में सचिन पायलट सहित कई दिग्गज नेता मौजूद थे, जिनके सामने मीणा ने आईना दिखाने का काम किया।
सियासी गलियारों में चर्चा तेज
हरीश मीणा के इस बयान को केवल भावनात्मक संबोधन नहीं, बल्कि वर्तमान 'जातीय राजनीति' और 'धनबल' के बढ़ते प्रभाव पर सीधा हमला माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग उनके इस बयान को "कड़वा सच" बताकर साझा कर रहे हैं।