संसद में अमित शाह की हुंकार 31 मार्च 2026 तक खत्म होगा नक्सलवाद, विपक्ष के हंगामे के बीच IBC बिल पेश
News India Live, Digital Desk: संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण गरमाया हुआ है। आज लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और निर्णायक बयान दिया। शाह ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश से नक्सलवाद का नामोनिशान मिटाने की समय सीमा तय कर दी गई है। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि 31 मार्च 2026 तक भारत पूरी तरह से नक्सल मुक्त हो जाएगा। इस दौरान सदन में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
नक्सलवाद पर 'जीरो टॉलरेंस': गृह मंत्री ने खींची लक्ष्मण रेखा
अमित शाह ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार नक्सलवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले एक दशक में नक्सली हिंसा की घटनाओं में 53 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। गृह मंत्री ने कहा कि सुरक्षा बलों के कड़े प्रहार और विकास की योजनाओं ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है। अब अंतिम प्रहार की बारी है और अगले एक साल के भीतर छत्तीसगढ़ समेत देश के सभी हिस्सों से इस समस्या को जड़ से खत्म कर दिया जाएगा।
विपक्ष पर वार: राहुल गांधी की उपस्थिति पर उठाए सवाल
सत्र के दौरान माहौल तब और गरमा गया जब अमित शाह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी की संसद में उपस्थिति (Attendance) के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि जब सदन में महत्वपूर्ण चर्चा चल रही होती है, तब नेता प्रतिपक्ष गायब रहते हैं। शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल हंगामा करना जानता है, जबकि सरकार देश के विकास और सुरक्षा के लिए गंभीर है। इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन की कार्यवाही में बाधा पहुंची।
दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) संशोधन विधेयक 2025 पेश
नक्सलवाद और राजनीतिक हमलों के बीच, सरकार ने आर्थिक सुधारों की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया। लोकसभा में 'दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025' पेश किया गया। इस बिल का उद्देश्य कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) को और अधिक पारदर्शी और तेज बनाना है। वित्त मंत्री की ओर से पेश किए गए इस विधेयक में फंसे हुए कर्ज की वसूली के लिए समय सीमा को और सख्त करने के प्रावधान किए गए हैं, ताकि बैंकिंग सेक्टर को मजबूती मिल सके।
स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की मांग
सदन में आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर भी भारी शोर-शराबा हुआ। विपक्षी सांसदों का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। हालांकि, अमित शाह ने विपक्ष के इन आरोपों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि स्पीकर का पद संवैधानिक है और इसकी गरिमा को राजनीतिक लाभ के लिए कम नहीं किया जाना चाहिए। हंगामे को देखते हुए सदन की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा।