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April 01 2026 03:16 am

होर्मुज जलडमरूमध्य खोले बिना ईरान से जंग खत्म करेंगे ट्रंप, नेतन्याहू और अरब देशों ने बढ़ाई टेंशन

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News India Live, Digital Desk: पश्चिमी एशिया में मचे घमासान और बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच अमेरिका से एक बेहद चौंकाने वाली रणनीतिक हलचल सामने आई है। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब ईरान के साथ चल रहे इस विनाशकारी युद्ध को खत्म करने के मूड में आ गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप प्रशासन ने अपने सहयोगियों को साफ कर दिया है कि वह दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक मार्गों में से एक 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को खोले बिना ही इस युद्ध पर विराम लगाने को तैयार हैं।

कूटनीति और सहयोगियों पर दांव अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से दी गई इस रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रंप और उनके रणनीतिकारों ने हाल ही में युद्ध की स्थिति का आकलन किया। उनका मानना है कि अगर अमेरिकी सेना इस अहम जलमार्ग को खोलने के लिए कोई बड़ा सैन्य अभियान चलाती है, तो युद्ध उनके द्वारा तय की गई चार से छह सप्ताह की समय-सीमा से कहीं आगे खिंच जाएगा। ऐसे में वाशिंगटन ने फैसला किया है कि अमेरिका को सैन्य उलझनों में पड़ने के बजाय अपने मुख्य रणनीतिक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। ट्रंप प्रशासन की योजना है कि मौजूदा सैन्य शत्रुता को तुरंत खत्म किया जाए और व्यापार के मुक्त प्रवाह को दोबारा शुरू करने के लिए तेहरान पर भारी कूटनीतिक दबाव बनाया जाए।

अधिकारियों का यह भी कहना है कि अगर तेहरान कूटनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकता है और यह तरीका नाकाम रहता है, तो अमेरिका अपनी रणनीति बदलेगा। तब अमेरिका यूरोप और खाड़ी देशों में बैठे अपने सहयोगियों पर यह दबाव डालेगा कि वे जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए कमान अपने हाथों में लें और पहल करें।

कैसे भड़की तनाव की चिंगारी और गहराया तेल संकट आपको बता दें कि इस महायुद्ध की आग 28 फरवरी को तब बेकाबू हो गई थी जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई अहम ठिकानों पर भीषण हमले किए थे। इन हमलों में ईरान को भारी जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा था। इसके पलटवार में ईरान ने भी इजरायली क्षेत्रों और पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए थे।

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ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़े इस भीषण तनाव का सबसे बड़ा खामियाजा वैश्विक अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य की प्रभावी रूप से नाकेबंदी हो चुकी है। यह मार्ग फारस की खाड़ी के देशों से पूरी दुनिया के बाजारों तक कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की आपूर्ति की जीवन रेखा है। इस नाकेबंदी ने न सिर्फ तेल के निर्यात को रोका है बल्कि उत्पादन के स्तर को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। यही वजह है कि आज दुनिया भर के अधिकांश देशों में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं।

इजरायल नहीं है युद्ध रोकने को तैयार जहां एक तरफ अमेरिका इस युद्ध से अपने कदम पीछे खींचने और ईरान के साथ सकारात्मक वार्ता की राह तलाश रहा है, वहीं उसके सबसे खास सहयोगी इजरायल के तेवर अब भी बेहद आक्रामक हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि वह फिलहाल युद्ध खत्म करने की कोई तारीख या समय सीमा नहीं बता सकते हैं। इजरायली रक्षा बल लगातार ईरान और लेबनान पर हवाई और जमीनी हमले कर रहे हैं। नेतन्याहू का दृढ़ता से कहना है कि उन्होंने अभी केवल 'आधा रास्ता' ही तय किया है, इसलिए युद्ध के शेड्यूल का ऐलान करना अभी संभव नहीं है।

अरब देशों की चौंकाने वाली मांग: युद्ध जारी रखें ट्रंप इस पूरे भू-राजनीतिक घटनाक्रम में सबसे हैरान करने वाला रुख अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देशों का है। एक ओर जहां ट्रंप शांति की बात कर रहे हैं, वहीं अरब देशों ने डोनाल्ड ट्रंप से निजी तौर पर अपील की है कि वह ईरान के खिलाफ युद्ध को जारी रखें। नाम न छापने की शर्त पर अधिकारियों ने बताया कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कुवैत और बहरीन के प्रतिनिधियों ने वाशिंगटन से अपनी निजी बातचीत में स्पष्ट किया है कि ईरान अभी "पर्याप्त रूप से कमजोर" नहीं हुआ है।

खाड़ी देशों का यह आक्रामक बयान ऐसे नाजुक वक्त में सामने आया है जब डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा कर रहे हैं कि ईरान का मौजूदा नेतृत्व काफी कमजोर हो चुका है और समझौते की मेज पर आने को तैयार है। हालांकि, कूटनीतिक दांव-पेच खेलते हुए ट्रंप ने ईरान को यह कड़ी चेतावनी भी दी है कि यदि जल्द ही कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, तो इस युद्ध को और अधिक तेज व विनाशकारी किया जा सकता है।