जोधपुर पहुंचे अमित शाह ने महेश्वरी समाज की किन बातों को पूरी दुनिया के लिए मिसाल बताया?
News India Live, Digital Desk: जोधपुर, जिसे हम सूर्य नगरी के नाम से जानते हैं, वहाँ की फिजाओं में इन दिनों एक अलग ही गर्माहट है। मौका था केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे का, लेकिन इस बार का आकर्षण राजनीति से ज़्यादा एक 'सामाजिक सरोकार' था। अमित शाह ने जब महेश्वरी समाज के एक बड़े कार्यक्रम को संबोधित किया, तो उनकी बातों में सिर्फ़ आंकड़े नहीं, बल्कि एक गहरा सम्मान और समाज के प्रति अटूट विश्वास साफ़ झलका।
जब समाज सेवा और व्यापार का मेल हुआ
अमित शाह ने साफ़ शब्दों में कहा कि देश की अर्थव्यवस्था (Economy) को पटरी पर लाने और उसे नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महेश्वरी समाज का जो योगदान रहा है, उसे नकारा नहीं जा सकता। अक्सर लोग व्यापार को सिर्फ़ मुनाफे से जोड़ते हैं, लेकिन गृह मंत्री ने याद दिलाया कि यह समाज 'लेने' से ज़्यादा 'देने' में यकीन रखता है। चाहे वह अस्पताल बनाना हो, धर्मशालाएं खड़ी करनी हों या मुसीबत में पड़े किसी अजनबी की मदद करनी हो—महेश्वरी समाज का सेवा भाव ही उनकी सबसे बड़ी पूँजी है।
"आपकी बदौलत बदल रहा है भारत"
भाषण के दौरान एक वक्त ऐसा भी आया जब माहौल काफी भावुक हो गया। अमित शाह ने कहा कि 2026 के भारत में जब हम विकसित होने का सपना देख रहे हैं, तो उसमें सिर्फ़ सरकार के प्रयास काफी नहीं हैं। इसमें समाज की सक्रियता और ईमानदारी की ज़रूरत है। उन्होंने जोधपुर की धरती की मिसाल देते हुए कहा कि यहाँ के लोग जहाँ भी जाते हैं, उस जगह को अपनी मेहनत से सोना बना देते हैं।
एक मज़बूत भविष्य की नींव
गृह मंत्री के इस दौरे को सिर्फ़ एक औपचारिकता कहना गलत होगा। उन्होंने युवाओं से खास अपील की कि वे अपनी जड़ों को न भूलें। व्यापार के साथ-साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं को बचाकर रखना ही असल प्रगति है। अमित शाह का जोधपुर पहुँचना और महेश्वरी समाज के दिग्गजों से मुलाक़ात करना यह संदेश देता है कि देश के नेतृत्व की नज़र में समाज के छोटे-बड़े हर काम का एक अलग महत्व है।
जोधपुर से क्या संदेश लेकर गई दुनिया?
जोधपुर की इस सभा से एक बात तो साफ़ हो गई है कि आने वाले समय में सामाजिक संगठनों की भूमिका और भी अहम होने वाली है। सरकार और समाज जब मिलकर कदम बढ़ाते हैं, तो रफ़्तार और भी तेज़ हो जाती है। अमित शाह के इस दौरे की चर्चा आने वाले कई दिनों तक न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे देश के सामाजिक हलकों में होती रहेगी।
सच्चाई तो यही है कि कोई भी देश तभी मज़बूत होता है, जब उसके समाज के भीतर संवेदना और व्यापार का एक सही तालमेल बना रहे।