ईरान और ओमान की इस गुप्त चाल से बढ़ी अमेरिका की धड़कनें, हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जे की तैयारी?
News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने वाशिंगटन से लेकर तेल अवीव तक हलचल मचा दी है। ईरान और ओमान मिलकर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की निगरानी के लिए एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। इसे अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इस समुद्री रास्ते पर नियंत्रण का मतलब है वैश्विक तेल आपूर्ति की लगाम अपने हाथ में लेना।
निगरानी के बहाने शक्ति प्रदर्शन की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, ईरान के सशस्त्र बल और ओमान की नौसेना एक ऐसे फ्रेमवर्क पर काम कर रहे हैं जो इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा और ट्रैफिक कंट्रोल को उनके सीधे प्रभाव में ले आएगा। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे समुद्री सुरक्षा और अवैध गतिविधियों को रोकने का कदम बताया जा रहा है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीधे तौर पर इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी को कमतर करने की एक सोची-समझी रणनीति है। ईरान लंबे समय से मांग करता रहा है कि खाड़ी देशों की सुरक्षा की जिम्मेदारी क्षेत्रीय शक्तियों की होनी चाहिए, न कि बाहरी ताकतों की।
अमेरिका-ईरान युद्ध की आहट और हॉर्मुज का महत्व
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह 'चोक पॉइंट' है जहां से वैश्विक कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। यदि ईरान और ओमान इस क्षेत्र की निगरानी के नियमों को बदलते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को देखते हुए इस प्रस्ताव का समय बेहद महत्वपूर्ण है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो ईरान को इस रास्ते पर गुजरने वाले हर जहाज की टोह लेने का कानूनी आधार मिल जाएगा, जिससे अमेरिका और इजरायल के हितों को सीधा नुकसान पहुँच सकता है।
कूटनीतिक गलियारों में मची खलबली
ओमान, जो पारंपरिक रूप से पश्चिम और ईरान के बीच एक मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है, उसका इस योजना में शामिल होना चौंकाने वाला है। जानकारों का कहना है कि ओमान अब अपनी समुद्री संप्रभुता को लेकर अधिक मुखर हो रहा है। उधर, अमेरिका इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। पेंटागन के अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के किसी भी एकपक्षीय निगरानी तंत्र से अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नौपरिवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) खतरे में पड़ सकती है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गरमा सकता है।