पाकिस्तान में अमेरिका ने खुद तबाह कर दिया था अपना सबसे गुप्त स्टील्थ ब्लैक हॉक, ईरान युद्ध के बीच क्यों चर्चा में आया ये किस्सा?
News India Live, Digital Desk: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच गहराते युद्ध के बाद एक बार फिर सैन्य इतिहास का वो पन्ना खुल गया है जिसने दुनिया को दंग कर दिया था। बात हो रही है 2 मई 2011 की उस रात की, जब अमेरिकी नेवी सील्स ने पाकिस्तान के एबटाबाद में घुसकर दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी ओसामा बिन लादेन को ढेर किया था। लेकिन उस मिशन में लादेन की मौत से ज्यादा चर्चा अमेरिका के उस 'सीक्रेट' हेलीकॉप्टर की हुई थी, जिसे पकड़े जाने के डर से अमेरिका ने खुद ही धमाके से उड़ा दिया था। आज जब ईरान के साथ तनाव चरम पर है, तो विशेषज्ञ फिर से उसी 'स्टील्थ तकनीक' और 'ब्लैक हॉक' हेलीकॉप्टर की चर्चा कर रहे हैं।
जब रडार को चकमा देकर पाकिस्तान में घुसा 'अदृश्य' शिकारी
एबटाबाद ऑपरेशन के दौरान अमेरिका ने अपने सबसे एडवांस और टॉप सीक्रेट 'स्टील्थ ब्लैक हॉक' हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया था। ये हेलीकॉप्टर ऐसे थे जिन्हें पाकिस्तान का कोई भी रडार पकड़ नहीं सका। इनकी बनावट और खास कोटिंग इन्हें आसमान में 'अदृश्य' बना देती थी। लेकिन मिशन के दौरान तकनीकी खराबी के कारण एक हेलीकॉप्टर लादेन के अहाते में ही क्रैश हो गया। अमेरिका नहीं चाहता था कि उसकी यह गुप्त तकनीक पाकिस्तान या चीन के हाथों लगे, इसलिए नेवी सील्स ने मिशन पूरा करने के बाद अपने ही हेलीकॉप्टर को बम से उड़ा दिया।
क्यों आज भी इस हेलीकॉप्टर के मलबे से डरता है अमेरिका?
उस रात धमाके के बाद हेलीकॉप्टर का पिछला हिस्सा (Tail) बच गया था, जिसकी तस्वीरों ने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों के होश उड़ा दिए थे। वह डिजाइन दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा था। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के खिलाफ संभावित हमले में भी अमेरिका इसी तरह की स्टील्थ तकनीक का इस्तेमाल कर सकता है। ईरान के पास रूस निर्मित खतरनाक एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे S-300) हैं, जिन्हें भेदने के लिए अमेरिका को फिर से उन्हीं 'अदृश्य' शिकारियों की जरूरत पड़ सकती है जिन्हें उसने एबटाबाद में आजमाया था।
ईरान युद्ध और 'ब्लैक हॉक' का कनेक्शन
सोशल मीडिया और डिफेंस फोरम पर यह चर्चा तेज है कि क्या अमेरिका फिर से पाकिस्तान जैसा कोई 'सर्जिकल स्ट्राइक' ईरान के परमाणु ठिकानों पर कर सकता है? ट्रंप प्रशासन के कड़े रुख के बीच 'स्टील्थ ब्लैक हॉक' का जिक्र इसलिए हो रहा है क्योंकि यह हेलीकॉप्टर घनी आबादी वाले इलाकों और अत्याधुनिक रडार सिस्टम के बीच घुसकर सटीक हमला करने में माहिर है। एबटाबाद की घटना ने साबित किया था कि अमेरिका अपनी तकनीक बचाने के लिए करोड़ों डॉलर के विमान को भी पल भर में खाक कर सकता है।
तकनीक की चोरी रोकने के लिए अमेरिका का 'सुसाइड' मिशन
एबटाबाद में हेलीकॉप्टर को नष्ट करना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि अमेरिका का एक सोची-समझी रणनीति (Scuttling) थी। अमेरिका को डर था कि अगर पाकिस्तान या किसी अन्य दुश्मन देश ने उस तकनीक को 'रिवर्स इंजीनियर' कर लिया, तो अमेरिकी वायु सेना की बादशाहत खत्म हो जाएगी। आज भी 'स्टील्थ ब्लैक हॉक' के बारे में बहुत कम जानकारियां सार्वजनिक हैं, जो इसे आधुनिक सैन्य इतिहास का सबसे रहस्यमयी विमान बनाती हैं।