ट्रंप की सेना बेकाबू? मिनियापोलिस में फिर चली गोली, 51 वर्षीय शख्स की मौत से अमेरिका सुन्न

Post

News India Live, Digital Desk: अमेरिका में जो कुछ हो रहा है, वह किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म की तरह डरावना होता जा रहा है। जब से डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने दोबारा राष्ट्रपति की कुर्सी संभाली है और अवैध प्रवासियों (Illegal Immigrants) को बाहर निकालने का आदेश दिया है, सड़कों पर हालात बदतर होते जा रहे हैं।

ताज़ा मामला मिनियापोलिस (Minneapolis) का है, जहाँ इमिग्रेशन विभाग की एक कार्रवाई ने फिर से खून बहाया है। एक 51 साल का व्यक्ति अपनी जान से हाथ धो बैठा है। आइए समझते हैं कि आखिर वहां ऐसा क्या हो गया कि गवर्नर तक को चेतावनी देनी पड़ी।

एक महीने में दूसरी मौत: इत्तेफाक या लापरवाही?

सबसे ज्यादा डराने वाली बात यह है कि यह पहली घटना नहीं है। अभी लोग पिछले महीने एक महिला की मौत को भूले भी नहीं थे कि अब शनिवार को फिर गोलियां चल गईं। होमलैंड सिक्योरिटी के एजेंट्स एक घर में तलाशी लेने पहुंचे थे। वहां क्या बहस हुई, यह अभी जांच का विषय है, लेकिन नतीजा यह निकला कि एक निहत्थे नागरिक (शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक) को गोली मार दी गई। अस्पताल ले जाते-जाते उसने दम तोड़ दिया।

लोग सवाल पूछ रहे हैं—क्या इमिग्रेशन चेक करने का यही तरीका है? क्या संदिग्ध होने की सजा सीधे मौत है?

गवर्नर टिम वॉल्ज का पारा सातवें आसमान पर

इस घटना ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच की लड़ाई को सड़क पर ला दिया है। मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज (Tim Walz) इस घटना के बाद बेहद गुस्से में नजर आए। उन्होंने जो कहा, वह बहुत गंभीर है। वॉल्ज का कहना है कि केंद्र सरकार (ट्रंप प्रशासन) ने ऐसे लोगों को सड़कों पर उतार दिया है जो पूरी तरह से 'ट्रेंड' भी नहीं हैं।

उन्होंने साफ लफ्ज़ों में कहा, "यह अस्वीकार्य है। आप अनियंत्रित और कम प्रशिक्षित बलों को हमारे शहरों में नहीं भेज सकते।" गवर्नर ने यहां तक कह दिया कि यह ऑपरेशन तुरंत रोका जाना चाहिए क्योंकि इससे शहर में अराजकता फैल रही है।

पुलिस और एजेंट्स के बीच तालमेल 'जीरो'

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इन 'फेडरल ऑपरेशन्स' के बारे में कई बार वहां की लोकल पुलिस को भी सही जानकारी नहीं होती। पुलिस चीफ भी हैरान हैं कि उनके शहर में फेडरल एजेंट्स कैसे काम कर रहे हैं। जब रक्षक ही आपस में लड़ने लगें या तालमेल न हो, तो आम जनता का पिसना तय है।

ट्रंप समर्थकों और विरोधियों में तनातनी

सोशल मीडिया पर दो गुट बंट गए हैं। एक तरफ ट्रंप के समर्थक हैं जो कह रहे हैं कि एजेंट्स ने अपनी जान बचाने के लिए गोली चलाई क्योंकि मरने वाला शख्स कथित तौर पर हथियार निकाल रहा था। वहीं दूसरी तरफ, चश्मदीदों का कहना है कि वह शख्स सिर्फ अपना फोन पकड़े हुए था। सच्चाई चाहे जो हो, लेकिन एक इंसान की मौत ने अमेरिका की राजनीति में आग में घी डालने का काम किया है।

अब सबकी निगाहें व्हाइट हाउस पर हैं। क्या ट्रंप इन रेड्स को रोकेंगे या सख्ती और बढ़ेगी? मिनियापोलिस की सड़कों पर फिलहाल सन्नाटा है, लेकिन यह तूफ़ान से पहले की शांति भी हो सकती है।