ईरान की मांद में घुसकर अमेरिका ने रचा इतिहास! CIA के 'मास्टर प्लान' से ऐसे बचाई घायल F-15 पायलट की जान, जानें पूरी इनसाइड स्टोरी
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भयंकर युद्ध के बीच अमेरिकी वायु सेना (US Air Force) ने एक ऐसा साहसिक कारनामा कर दिखाया है, जिसने इतिहास के पन्नों में अपनी जगह बना ली है। दुश्मन की जमीन पर गिरे अपने एक फाइटर पायलट को बचाने के लिए अमेरिका ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और एक नामुमकिन से दिखने वाले सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। सोमवार रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने दुनिया के सामने इस 'सुपर सीक्रेट' मिशन की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी साझा की।
ईरान में जा गिरा था F-15 फाइटर जेट का पायलट
दरअसल, इस युद्ध के दौरान ईरान ने अमेरिका के एक बेहद एडवांस एफ-15 (F-15) फाइटर जेट को मार गिराया था। इस लड़ाकू विमान में दो वेपन सिस्टम्स ऑफिसर (पायलट) सवार थे, जिनमें से एक इजेक्ट होने के बाद सीधे ईरान की सरजमीं पर जा गिरा। दुश्मन के गढ़ में एक अमेरिकी सैनिक का फंसना किसी बड़े खतरे से कम नहीं था, लेकिन अमेरिकी सेना ने हार नहीं मानी।
CIA ने रचा 'मास्टर प्लान', ईरानियों को किया गुमराह
व्हाइट हाउस में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खुफिया एजेंसी CIA के निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने बताया कि इस पायलट को खोजने के लिए अमेरिका ने अपनी सबसे अत्याधुनिक तकनीक और मानव संसाधनों (Human Resources) का इस्तेमाल किया, जो दुनिया की किसी भी अन्य खुफिया एजेंसी के पास नहीं है।
धोखा देने वाला ऑपरेशन (Deception Op): रैटक्लिफ ने खुलासा किया कि CIA ने असली ऑपरेशन को छिपाने के लिए एक 'धोखा देने वाला ऑपरेशन' भी चलाया, ताकि ईरानी सैनिक पायलट की खोज में पूरी तरह से गुमराह हो जाएं।
रेगिस्तान में दाना खोजने जैसा: उन्होंने इस मिशन को "रेगिस्तान में एक दाने की तलाश" के बराबर मुश्किल बताया।
CIA के इस चकमे ने ईरानियों को शर्मिंदा कर दिया। हालांकि, सुरक्षा कारणों से रैटक्लिफ ने इस ऑपरेशन में इस्तेमाल की गई तकनीक के बारे में किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया।
ट्रंप की जुबानी: खून से लथपथ पायलट और 21 विमानों की गूंज
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन के रोंगटे खड़े कर देने वाले पल साझा किए। उन्होंने बताया कि आम तौर पर युद्ध के दौरान, खासकर जब दुश्मन बेहद ताकतवर हो, तो एक सैनिक को बचाने के लिए 200 सैनिकों की जान जोखिम में डालना बहुत मुश्किल होता है। लेकिन अमेरिका ने यह जोखिम उठाया।
21 लड़ाकू विमानों की तैनाती: अमेरिकी सेना ने दुश्मन (ईरान) के हवाई क्षेत्र में 21 सैन्य विमान उतारे, जिनमें से कई रडार से बचने के लिए बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भर रहे थे।
पायलट का संघर्ष: ट्रंप ने बताया कि पायलट बहुत बुरी तरह घायल हो गया था और उसके शरीर से काफी खून बह रहा था।
ईरान ने रखा था इनाम: ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) पागलों की तरह उसका पीछा कर रहे थे और उन्होंने स्थानीय लोगों को अमेरिकी पायलट को पकड़वाने के लिए भारी इनाम देने की भी घोषणा की थी।
चट्टानों पर चढ़ाई: अपहरण और बंधक बनने से बचने के लिए उस घायल पायलट ने अपनी ट्रेनिंग का इस्तेमाल किया और एक बेहद ऊंची चट्टान पर चढ़ाई कर ली। उसने खुद ही अपने जख्मों का प्राथमिक इलाज (First Aid) किया।
'हम अपने किसी भी सैनिक को पीछे नहीं छोड़ते'
राष्ट्रपति ट्रंप ने भावुक लेकिन सख्त लहजे में कहा कि यह फैसला लेना बहुत मुश्किल था। इस ऑपरेशन में हमारे 100 से ज्यादा सैनिक भी मारे जा सकते थे। हमारे लड़ाकू विमानों पर बहुत करीब से भीषण गोलीबारी की गई। लेकिन अमेरिकी सेना का एक ही उसूल है— "हम किसी भी सैनिक को पीछे नहीं छोड़ते" (We leave no soldier behind)।