Amalaki Ekadashi 2026 : रंगभरी एकादशी पर शाम को करें ये 5 अचूक उपाय, बरसेगी महालक्ष्मी की कृपा और घर आएगी सुख-समृद्धि
News India Live, Digital Desk : हिंदू धर्म में आमलकी एकादशी, जिसे रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, का विशेष महत्व है। साल 2026 में यह पावन तिथि 1 मार्च (रविवार) को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ आंवले के वृक्ष की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एकादशी की शाम को किए गए कुछ विशेष उपाय आपकी सोई हुई किस्मत जगा सकते हैं?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, एकादशी की शाम 'प्रदोष काल' के समय किए गए ये टोटके धन की तंगी दूर करने और पारिवारिक कलेश मिटाने में बेहद कारगर माने जाते हैं।
एकादशी की शाम जरूर करें ये 5 उपाय (Evening Remedies)
आंवले के पेड़ के नीचे दीपदान: शाम के समय आंवले के पेड़ के नीचे शुद्ध घी का दीपक जलाएं। पेड़ की सात बार परिक्रमा करें। माना जाता है कि आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है।
तुलसी के पास जलाएं नौ बत्तियां: एकादशी की संध्या को तुलसी के पौधे के सामने घी का दीपक जलाएं। यदि संभव हो तो दीपक में नौ बत्तियां रखें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और धन आगमन के मार्ग खुलते हैं।
पीले फूल और विष्णु सहस्रनाम: शाम को भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करें और 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ करें। यदि आप कर्ज से परेशान हैं, तो यह उपाय आपके लिए वरदान साबित हो सकता है।
मुख्य द्वार पर स्वास्तिक: शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर हल्दी या कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं। यह माता लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक माना जाता है और घर में बरकत लाता है।
सफेद वस्तुओं का दान: चूंकि यह 'रंगभरी एकादशी' भी है, इसलिए शाम को किसी मंदिर में मिश्री, दूध या सफेद मिठाई का दान करना अत्यंत शुभ फलदायी रहता है।
आमलकी एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
एकादशी तिथि प्रारंभ: 28 फरवरी 2026, शाम 06:12 बजे से।
एकादशी तिथि समाप्त: 01 मार्च 2026, दोपहर 03:45 बजे तक।
व्रत पारण का समय: 02 मार्च 2026, सुबह 06:45 से 09:02 के बीच।
क्यों खास है यह एकादशी?
धार्मिक पुराणों के अनुसार, आमलकी एकादशी ही वह दिन है जब भगवान विष्णु ने आंवले को आदि वृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित किया था। साथ ही, वाराणसी में इस दिन बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार होता है और भक्त उनके साथ अबीर-गुलाल से होली खेलते हैं, इसलिए इसे रंगभरी एकादशी भी कहते हैं।