गूगल का बड़ा एक्शन 17.5 लाख खतरनाक ऐप्स पर लगा बैन, 80 हजार डेवलपर्स को किया ब्लैकलिस्ट
News India Live, Digital Desk: एंड्रॉइड यूजर्स की सुरक्षा को लेकर गूगल ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। कंपनी ने अपनी लेटेस्ट 2025-26 सुरक्षा रिपोर्ट में बताया है कि उसने 1.75 मिलियन (17.5 लाख) से अधिक ऐसे ऐप्स को प्ले स्टोर पर आने से रोक दिया जो गूगल की सुरक्षा नीतियों का उल्लंघन कर रहे थे। इसके साथ ही, धोखाधड़ी करने वाले 80,000 डेवलपर अकाउंट्स को स्थायी रूप से बैन कर दिया गया है।
क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई? (Reasons for Purge)
गूगल के अनुसार, ये ऐप्स और डेवलपर्स कई तरह के डिजिटल अपराधों में शामिल थे:
वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Fraud): बैंकिंग डिटेल्स चुराना और अवैध ट्रांजैक्शन करना।
डेटा चोरी: यूजर्स की अनुमति के बिना उनकी लोकेशन, कॉन्टैक्ट्स और पर्सनल मैसेज तक पहुँच बनाना।
छिपे हुए सब्सक्रिप्शन: यूजर्स को बताए बिना उनके अकाउंट से पैसे काटने वाले ऐप्स।
मैलवेयर और स्पाइवेयर: फोन को स्लो करना और बैकग्राउंड में जासूसी करना।
AI बना गूगल का नया 'डिजिटल गार्ड'
इस बार गूगल ने इंसानी रिव्यू के साथ-साथ Generative AI और एडवांस मशीन लर्निंग टूल्स का इस्तेमाल किया है।
10,000+ सुरक्षा जांच: अब प्ले स्टोर पर आने वाले हर ऐप को पब्लिश होने से पहले 10,000 से अधिक सेफ्टी चेक से गुजरना पड़ता है।
सेंसिटिव डेटा सुरक्षा: एआई टूल्स की मदद से 2.55 लाख ऐप्स को संवेदनशील डेटा का गलत एक्सेस लेने से पहले ही ब्लॉक कर दिया गया।
स्पैम रिव्यू पर वार: गूगल ने 160 मिलियन (16 करोड़) फर्जी रेटिंग्स और रिव्यूज को हटाया है, जो खराब ऐप्स को अच्छी रेटिंग दिखाकर प्रमोट कर रहे थे।
Google Play Protect: अब और भी ज्यादा शक्तिशाली
गूगल ने Play Protect को अपडेट किया है, जो अब रोजाना 350 बिलियन (350 अरब) ऐप्स को स्कैन करता है।
साइडे लोडिंग पर नजर: प्ले स्टोर के बाहर (जैसे ब्राउज़र या व्हाट्सएप से) इंस्टॉल किए गए 27 मिलियन खतरनाक ऐप्स की पहचान की गई है।
इन-कॉल स्कैम प्रोटेक्शन: नए फीचर के तहत कॉल के दौरान कोई भी ऐप 'प्ले प्रोटेक्ट' को डिसेबल नहीं कर पाएगा, जिससे 'सोशल इंजीनियरिंग' हमलों से बचाव होगा।
आप खुद को कैसे सुरक्षित रखें? (Safety Tips for Users)
Play Protect ऑन रखें: अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर सुनिश्चित करें कि Google Play Protect हमेशा एक्टिव रहे।
परमिशन चेक करें: ऐप इंस्टॉल करते समय यह जरूर देखें कि क्या ऐप वैसी परमिशन मांग रहा है जिसकी उसे जरूरत नहीं है (जैसे कैलकुलेटर ऐप को 'कॉन्टैक्ट' या 'कैमरा' की जरूरत नहीं होती)।
रिव्यू और रेटिंग्स: केवल अच्छी रेटिंग पर भरोसा न करें, बल्कि 'Critical Reviews' भी पढ़ें।
अनजान सोर्स से बचें: कभी भी किसी लिंक या अनऑफिशियल वेबसाइट से APK फाइल इंस्टॉल न करें।