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March 21 2026 11:03 am

Allahabad High Court: मकान मालिक की 'निजी जरूरत' किरायेदार की मजबूरी से बड़ी! हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया दुकान खाली कराने का नियम

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कानूनी डेस्क, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मकान मालिक और किरायेदार के बीच चल रहे विवादों पर एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति अजित कुमार की पीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि मकान मालिक को अपनी संपत्ति की व्यक्तिगत और वास्तविक आवश्यकता (Bonafide Requirement) है, तो किरायेदार को वह जगह खाली करनी ही होगी। अदालत ने संपत्ति के अधिकार को प्राथमिकता देते हुए कहा कि किरायेदार मकान मालिक को यह निर्देश नहीं दे सकता कि उसे अपना काम कहाँ या कैसे करना चाहिए।

निजी जरूरत होने पर खाली करनी होगी दुकान या मकान

हाई कोर्ट ने एक याचिका को खारिज करते हुए सख्त लहजे में कहा कि जब मकान मालिक की ज़रूरत 'वास्तविक' साबित हो जाती है, तो कानूनी तौर पर उसमें हस्तक्षेप की गुंजाइश खत्म हो जाती है। इस मामले में मकान मालिक ने अपनी दो दुकानों को खाली कराने की मांग की थी। कोर्ट ने पाया कि मालिक की आवश्यकता किरायेदार की उस दलील से कहीं अधिक महत्वपूर्ण थी कि उसे दुकान छोड़ने में कठिनाई होगी। संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत ऐसी याचिकाओं में राहत नहीं दी जा सकती जहाँ मालिक का हक प्राथमिक और सच्चा हो।

स्वरोजगार के लिए दुकान खाली कराना पूरी तरह 'जायज'

इस केस का सबसे अहम पहलू यह था कि मकान मालिक ने दुकान खाली कराने के पीछे एक ठोस कारण दिया था—वह वहां अपनी मोटरसाइकिल और स्कूटर मरम्मत (Repair Shop) का बिज़नेस शुरू करना चाहता था।

अदालत और निर्धारित प्राधिकारी (Prescribed Authority) ने इसे 'वास्तविक आवश्यकता' माना। कोर्ट ने कहा कि मकान मालिक को अपना स्वरोजगार शुरू करने की ज़रूरत, किरायेदार की दुकान न छोड़ने की मजबूरी से कहीं अधिक बड़ी है। कानून मालिक को अपनी संपत्ति का उपयोग अपने आर्थिक विकास के लिए करने का पूरा हक देता है।

मकान मालिक ही तय करेगा बिजनेस के लिए कौन सी जगह है 'बेस्ट'

किरायेदार अक्सर दलील देते हैं कि मकान मालिक के पास और भी जगहें हैं, वह वहां अपना काम क्यों नहीं करता? इस पर हाई कोर्ट ने कानून की स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है:

मालिक की पसंद सर्वोपरि: किरायेदार मकान मालिक को यह मजबूर नहीं कर सकता कि वह अपनी दुकान किसी दूसरी जगह पर खोले।

वैकल्पिक आवास का नियम: कोर्ट यह जरूर देखता है कि क्या किरायेदार के पास कहीं और जाने का विकल्प है, लेकिन यदि मालिक की ज़रूरत सच्ची है, तो मालिक ही यह तय करने का सबसे बेहतर जज है कि उसके परिवार या बिज़नेस के लिए कौन सी जगह फिट है।

यूपी शहरी किराया नियंत्रण नियम: कोर्ट ने माना कि निर्धारित प्राधिकारी द्वारा दुकान खाली कराने का आदेश नियम 16(1)(डी) के तहत पूरी तरह सही था, क्योंकि मकान मालिक की ज़रूरतें कानूनी कसौटी पर खरी उतरीं।

अदालत ने संतुलन के लिए रखी ये शर्त

हालांकि फैसला मकान मालिक के पक्ष में है, लेकिन कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल किरायेदार को परेशान करने या दुर्भावना (Malafide Intention) के कारण घर खाली नहीं कराया जा सकता। मकान मालिक को कोर्ट के सामने यह साबित करना होगा कि उसकी मांग के पीछे कोई ठोस और सच्ची वजह है।

इस फैसले से उन मकान मालिकों को बड़ी राहत मिली है जो अपनी ही संपत्ति का उपयोग करने के लिए सालों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। वहीं किरायेदारों के लिए यह संदेश है कि वैधानिक आवश्यकता होने पर उन्हें संपत्ति छोड़नी ही पड़ेगी।