Akhilesh vs Keshav: यूपी उपचुनाव के बाद रार ,दिल में चोर वाले बयान से मौर्य ने किस पर साधा निशाना?

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News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश की राजनीति में शांति रहे, ऐसा भला कैसे हो सकता है? उपचुनावों के बाद जहां एक तरफ नतीजों की चर्चा है, वहीं दूसरी तरफ हार-जीत के कारणों पर घमासान छिड़ा हुआ है। समाजवादी पार्टी (SP) और अखिलेश यादव लगातार प्रशासन और पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं। कभी आईडी चेक करने को लेकर, तो कभी वोट न डालने देने को लेकर।

लेकिन अब यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) ने विपक्ष के इन आरोपों पर जो पलटवार किया है, उसने सियासी पारे को और गरमा दिया है।

अक्सर जब कोई हारता है या डरता है, तो वो बहाने ढूंढता है—मौर्य का इशारा साफ तौर पर इसी तरफ था। उन्होंने अपने खास अंदाज में विरोधियों को आईना दिखाया है। आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर उन्होंने क्या कहा और इसके सियासी मायने क्या हैं।

"सर-सर चिल्लाने वालों की नीयत में खोट है"
विपक्ष लगातार पुलिस-प्रशासन (जिन्हें 'सर' कहकर संबोधित किया जा रहा था) पर दबाव बनाने या डराने का आरोप लगा रहा था। इस पर केशव मौर्य ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग बेवजह 'सर-सर' का हल्ला मचा रहे हैं या पुलिस की कार्यवाही पर सवाल उठा रहे हैं, असल में "चोर उनके दिल में बैठा है।"

उनका मतलब साफ़ था— जिसे फर्जी वोटिंग (Fake Voting) करने से रोका गया, वही आज सबसे ज्यादा शोर मचा रहा है। एक ईमानदार वोटर को आईडी (ID) दिखाने में या चेकिंग करवाने में कोई डर नहीं लगता, लेकिन जो गड़बड़ी करने आए थे, पुलिस की सख्ती ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।

वोट चोरी या हार की बौखलाहट?
मौर्य ने तंज कसते हुए कहा कि विरोधी दल, खासकर समाजवादी पार्टी, अपनी हार को पहले ही भांप चुकी है। इसलिए नतीजों से पहले ही उन्होंने 'दोषारोपण' का खेल शुरू कर दिया है। इसे आप "खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे" वाली कहावत से भी समझ सकते हैं।

डिप्टी सीएम ने यह भी साफ़ किया कि योगी सरकार में कानून का राज है। पुलिस का काम निष्पक्ष चुनाव कराना था, और अगर किसी ने फर्जी आईडी से वोट डालने की कोशिश की और पुलिस ने उसे रोका, तो इसमें गलत क्या है? इसे 'वोट चोरी' का नाम देना विपक्ष की हताशा दिखाता है।