ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत के बाद कश्मीर में भारी तनाव, सड़कों पर उतरे लोग जानें क्या है पूरा मामला

Post

News India Live, Digital Desk : ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने अब भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में भी हलचल पैदा कर दी है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की एक सैन्य हमले में कथित मौत की खबर फैलते ही कश्मीर घाटी के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। लोग सड़कों पर उतरकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन अलर्ट मोड पर है।

कश्मीर के शिया बहुल इलाकों में प्रदर्शन की लहर

 खामेनेई की मौत की खबर के बाद श्रीनगर के सैदा कदल, पुराने शहर और मध्य कश्मीर के बडगाम जैसे शिया बहुल इलाकों में तनाव फैल गया। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हाथ में खामेनेई की तस्वीरें लिए प्रदर्शनकारी इस हमले को "पूरी मानवता पर प्रहार" बता रहे हैं। कश्मीर के अलावा लद्दाख के कारगिल क्षेत्र से भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शनों की खबरें सामने आई हैं।

क्यों भड़का है गुस्सा? जानें पूरा घटनाक्रम

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी और इजरायली सेना ने ईरान में एक साझा सैन्य अभियान चलाया। ईरानी मीडिया ने पुष्टि की है कि इस हमले में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की जान चली गई है। इस खबर ने न केवल मध्य पूर्व (Middle East) बल्कि दुनिया भर में ईरान समर्थकों को झकझोर कर रख दिया है। कश्मीर में ऐतिहासिक रूप से ईरान के प्रति धार्मिक और सांस्कृतिक सहानुभूति रही है, यही कारण है कि यहाँ के लोग इस घटना को लेकर काफी संवेदनशील हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और नेताओं की प्रतिक्रिया

हालात को देखते हुए कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बल संवेदनशील इलाकों में गश्त कर रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। वहीं, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती जैसे राजनेताओं ने भी इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है और इसे विदेशी आक्रामकता करार दिया है।

भारत में ईरान के प्रतिनिधि ने क्या कहा?

हालांकि एक ओर मौत की पुष्टि की खबरें हैं, वहीं भारत में अयातुल्ला खामेनेई के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने इन रिपोर्टों को "मानसिक युद्ध" (Mental Warfare) करार दिया है। उनका कहना है कि सर्वोच्च नेता सुरक्षित हैं और यह केवल भ्रम फैलाने की कोशिश है। इस विरोधाभासी बयानों के बीच घाटी में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

--Advertisement--