नसीहत या फटकार? मौलाना मदनी ने भरी सभा में कांग्रेस को याद दिलाया उसका पुराना पाप
News India Live, Digital Desk : राजनीति में कहा जाता है कि सबसे कड़ी आलोचना वो होती है जो आपके विरोधियों की तरफ से नहीं, बल्कि उन लोगों की तरफ से आए जिन्हें आपका हमदर्द माना जाता है। कांग्रेस (Congress) के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद (Jamiat Ulama-e-Hind) के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी (Maulana Arshad Madani) ने कांग्रेस पार्टी को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जो किसी तीखी 'नसीहत' या 'फटकार' से कम नहीं है।
अक्सर मुस्लिम संगठन भाजपा की नीतियों की आलोचना करते दिखते हैं, लेकिन इस बार मदनी का निशाना सीधे देश की सबसे पुरानी पार्टी यानी कांग्रेस पर था। उन्होंने साफ़ शब्दों में बता दिया कि आखिर कांग्रेस आज सत्ता (Power) से बाहर क्यों है।
"डरकर नहीं, डटकर मुकाबला करना चाहिए था"
मौलाना अरशद मदनी ने अपनी बात बहुत ही सीधे और सच्चे शब्दों में रखी। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस ने अपने शासन काल में सांप्रदायिकता (Communalism) के खिलाफ एक मजबूत स्टैंड लिया होता, तो आज उसकी ये हालत नहीं होती।
उनका इशारा साफ था जब कांग्रेस सत्ता में थी, तो उसने सांप्रदायिकता फैलाने वाली ताकतों के खिलाफ उतनी सख्ती नहीं दिखाई, जितनी दिखानी चाहिए थी। शायद वोट बैंक खिसकने के डर से या किसी और रणनीति के तहत वे नरम पड़ गए। और मदनी के मुताबिक, यही उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई।
क्या है इस बयान का मतलब?
इसे आसान भाषा में समझें तो मदनी यह कहना चाह रहे हैं कि "आपने बीमारी का इलाज तब नहीं किया जब वो छोटी थी, अब वो नासूर बन गई है तो आप रो रहे हैं।"
मदनी ने माना कि देश में नफरत का माहौल बढ़ा है, लेकिन इसका ठीकरा उन्होंने सिर्फ मौजूदा सरकार पर नहीं फोड़ा। उन्होंने कांग्रेस को याद दिलाया कि नींव तो आपकी चुप्पी ने ही खोखली की थी। उनका कहना था, "अगर उन्होंने (कांग्रेस ने) सांप्रदायिकता के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया होता, तो उन्हें सत्ता से बाहर नहीं होना पड़ता।"
धर्मनिरपेक्षता सिर्फ बातों में नहीं, काम में चाहिए
मदनी का यह बयान एक तरह से 'रियलिटी चेक' है। उन्होंने कांग्रेस और बाकी विपक्षी पार्टियों (Secular Parties) को यह समझाने की कोशिश की है कि धर्मनिरपेक्षता (Secularism) का ढोल पीटने से कुछ नहीं होगा। आपको मैदान में उतरकर, बिना डरे हर उस ताकत से लड़ना होगा जो समाज को बांटती है। अगर आप 'सॉफ्ट' बनेंगे, तो जनता आपको भी खारिज कर देगी।
कांग्रेस के लिए चेतावनी
यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस वापसी की राह देख रही है। अल्पसंख्यक समुदाय, जो परंपरागत रूप से कांग्रेस का वोट बैंक माना जाता है, अगर उसका सबसे बड़ा नेता ऐसे सवाल खड़े कर रहा है, तो पार्टी को अपनी रणनीति पर दोबारा सोचने की जरूरत है। मदनी ने इशारों में बता दिया है कि भरोसा जीतने के लिए 'दिखावा' नहीं, 'हिम्मत' चाहिए।