दहेज हत्या से कम नहीं है एसिड अटैक, जानिए क्यों सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को 11 साल बाद भी बेल नहीं दी

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News India Live, Digital Desk: आजकल हम अक्सर रिश्तों में होने वाले छोटे-मोटे झगड़ों के बारे में सुनते हैं। लेकिन कभी-कभी ये झगड़े एक ऐसा भयानक मोड़ ले लेते हैं, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। ऐसा ही एक मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, तो देश की सबसे बड़ी अदालत ने जो कहा, वो हम सबके लिए जानना बहुत ज़रूरी है।

आखिर मामला क्या था?

बात एक ऐसे शख्स की है, जिसने अपनी लिव-इन पार्टनर पर तेजाब फेंक दिया था। इस जुर्म के लिए वो पिछले 11 सालों से जेल में है। अब उसने सुप्रीम कोर्ट में ज़मानत (बेल) के लिए अर्ज़ी लगाई थी।

उसने अपनी दलील में कहा कि ये कोई सोची-समझी साज़िश नहीं थी। बस, अचानक झगड़ा हुआ और गुस्से में उसने ऐसा कर दिया। वो इसे एक छोटी-सी घटना बताने की कोशिश कर रहा था।

सुप्रीम कोर्ट का वो जवाब जो दिल जीत ले

जब चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने यह सुना, तो उनका रुख़ बेहद सख्त था। उन्होंने उस शख्स की दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया।

जस्टिस सूर्यकांत ने एक ऐसी बात कही जो सोचने पर मजबूर कर देती है। उन्होंने पूछा, "अचानक हुए झगड़े में कोई अपनी जेब में तेजाब की बोतल लेकर क्यों घूमेगा? ये बातें हमें मत समझाइए।"

उनकी इस एक लाइन में ही पूरी सच्चाई छिपी थी। गुस्सा अपनी जगह है, लेकिन तेजाब किसी के पास तभी होता है जब उसके इरादे नेक न हों।

"पीड़ित की तो पूरी जिंदगी बर्बाद हो गई"

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इस मामले को और भी गहराई से देखा। उन्होंने कहा कि यह अपराध दहेज हत्या से किसी भी मायने में कम गंभीर नहीं है, बल्कि कुछ मामलों में तो उससे भी ज्यादा दर्दनाक है।

उन्होंने कहा, "आप सोचिए उस महिला के बारे में। आपने उसे जिंदगी भर का दर्द दे दिया है। उसका चेहरा, उसकी पहचान, सब कुछ छीन लिया। वो हर दिन उस दर्द के साथ जी रही है। ये कोई मामूली अपराध नहीं, एक बहुत ही घिनौना जुर्म है।"

कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसे मामलों में नरमी दिखाने का सवाल ही नहीं उठता। जिसके बाद, आरोपी की ज़मानत अर्ज़ी को तुरंत खारिज कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट का यह नज़रिया सिर्फ एक फैसला नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक संदेश है। यह संदेश उन तमाम पीड़ितों के लिए उम्मीद की एक किरण है, जो सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक पीड़ा से भी हर रोज़ लड़ते हैं। यह बताता है कि कानून उनकी तकलीफ को समझता है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।