Abortion and Periods: गर्भपात के बाद कब आते हैं पीरियड्स? शरीर में होने वाले इन 5 बदलावों को न करें नजरअंदाज, जानें पूरी सच्चाई
नई दिल्ली। महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर अक्सर समाज में खुलकर बात नहीं की जाती, खासकर जब बात 'एबॉर्शन' (Abortion) की हो। गर्भपात चाहे चिकित्सकीय (Medical) हो या स्वतः (Miscarriage), इसका सीधा असर महिला के मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle) पर पड़ता है। एबॉर्शन के बाद शरीर को दोबारा सामान्य स्थिति में आने में समय लगता है, क्योंकि इस दौरान प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन्स का स्तर अचानक बदल जाता है। महिलाओं के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि गर्भपात के बाद उनके पीरियड्स कब सामान्य होंगे और इस दौरान होने वाली ब्लीडिंग कितनी सामान्य है।
गर्भपात के तुरंत बाद होने वाली ब्लीडिंग: पीरियड्स या कुछ और?
एबॉर्शन के तुरंत बाद होने वाली ब्लीडिंग को वास्तविक 'पीरियड' नहीं माना जाता। यह शरीर द्वारा गर्भाशय के ऊतकों (Tissues) को बाहर निकालने की प्रक्रिया है। यदि गर्भपात दवाइयों के जरिए हुआ है, तो भारी ब्लीडिंग और थक्के (Clots) दिख सकते हैं जो कुछ दिनों से लेकर दो सप्ताह तक चल सकते हैं। वहीं, सर्जिकल एबॉर्शन के मामले में ब्लीडिंग कम समय के लिए होती है।
पहला पीरियड कब आता है? (When to expect the first period)
अधिकांश महिलाओं में गर्भपात के 4 से 6 सप्ताह के भीतर पहला सामान्य पीरियड आ जाता है। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करता है कि गर्भावस्था कितने समय की थी। चूंकि शरीर से प्रेगनेंसी हार्मोन (hCG) को पूरी तरह खत्म होने में समय लगता है, इसलिए कुछ मामलों में इसमें 8 सप्ताह तक की देरी भी हो सकती है। यदि 8 सप्ताह के बाद भी पीरियड्स शुरू न हों, तो डॉक्टर से संपर्क करना अनिवार्य है।
पीरियड्स के स्वरूप में बदलाव: क्या होगा अलग?
गर्भपात के बाद आने वाला पहला या दूसरा पीरियड आपके सामान्य दिनों से अलग हो सकता है:
भारी ब्लीडिंग (Heavy Flow): गर्भाशय की परत पूरी तरह साफ होने के कारण रक्तस्राव अधिक हो सकता है।
अत्यधिक दर्द: सामान्य दिनों की तुलना में अधिक ऐंठन (Cramps) महसूस हो सकती है।
अनियमितता: अगले कुछ महीनों तक चक्र छोटा या बड़ा हो सकता है, जो धीरे-धीरे सामान्य हो जाता है।
ओव्यूलेशन और दोबारा गर्भधारण का खतरा
एक बड़ी गलतफहमी यह है कि पीरियड्स आने तक महिला दोबारा गर्भवती नहीं हो सकती। सच यह है कि गर्भपात के 2 सप्ताह बाद ही ओव्यूलेशन (अंडा बनना) शुरू हो सकता है। इसका मतलब है कि पीरियड्स आने से पहले ही आप दोबारा गर्भधारण कर सकती हैं। यदि आप जल्द ही दूसरी प्रेगनेंसी नहीं चाहतीं, तो गर्भपात के तुरंत बाद गर्भनिरोधक उपायों का उपयोग शुरू करना चाहिए।
इन खतरों के संकेतों को पहचानें (Warning Signs)
यदि एबॉर्शन के बाद आपको निम्नलिखित समस्याएं हों, तो यह संक्रमण या जटिलता का संकेत हो सकता है:
लगातार बहुत भारी ब्लीडिंग (हर घंटे 2 पैड का भीगना)।
तेज बुखार और ठंड लगना।
योनि से दुर्गंधयुक्त डिस्चार्ज होना।
पेट के निचले हिस्से में असहनीय दर्द जो दवा से ठीक न हो।