पंजाब में कांग्रेस-बीजेपी और अकाली दल को तगड़ा झटका दिग्गज नेताओं ने थामा आप का दामन,भगवंत मान ने दिलाई सदस्यता
News India Live, Digital Desk: पंजाब की सियासत में सोमवार को उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया जब कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के कई दिग्गज चेहरों ने एक साथ अपनी पार्टियों को अलविदा कह दिया। मुख्यमंत्री भगवंत मान की मौजूदगी में इन नेताओं ने आम आदमी पार्टी (AAP) का 'झाड़ू' थाम लिया है। लोकसभा चुनावों से ठीक पहले हुए इस बड़े दलबदल को विपक्षी खेमे के लिए एक विनाशकारी झटके के रूप में देखा जा रहा है, जिससे माझा और मालवा बेल्ट के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।
भगवंत मान का मिशन '13-0' और विपक्ष में सेंधमारी मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चंडीगढ़ स्थित अपने आवास पर इन नेताओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग 'आप' की नीतियों और विकास कार्यों से प्रभावित हैं, यही वजह है कि पारंपरिक पार्टियों के ईमानदार नेता अब घुटने टेक रहे हैं। विपक्षी दलों के ये नेता अपने साथ सैकड़ों समर्थकों और स्थानीय पदाधिकारियों की फौज भी लेकर आए हैं। जानकारों का मानना है कि इस सेंधमारी से जालंधर, लुधियाना और अमृतसर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कांग्रेस और अकाली दल का आधार बुरी तरह हिल गया है।
इन दिग्गजों ने बदला पाला, कइयों के कटे टिकट रिपोर्ट्स के मुताबिक, शामिल होने वाले नेताओं में कुछ पूर्व विधायक और प्रभावशाली जिला अध्यक्ष शामिल हैं। चर्चा है कि टिकट न मिलने से नाराज चल रहे कई वरिष्ठ नेता पिछले कुछ दिनों से 'आप' नेतृत्व के संपर्क में थे। मुख्यमंत्री मान ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े धमाके हो सकते हैं और विपक्ष के कई और 'किले' ढहने वाले हैं। इस बदलाव ने बीजेपी की पंजाब में विस्तार की योजनाओं को भी तगड़ा झटका दिया है, जो हाल के दिनों में अकाली दल से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही थी।
विपक्ष में मातम, बगावत की आग तेज कांग्रेस और अकाली दल के लिए यह स्थिति 'कोढ़ में खाज' जैसी है। एक तरफ जहां उनके अपने नेता साथ छोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कार्यकर्ताओं का मनोबल भी गिर रहा है। कांग्रेस की प्रदेश इकाई में अंदरूनी कलह पहले से ही चरम पर थी, जो अब सार्वजनिक पलायन के रूप में सामने आ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर यही रफ्तार जारी रही, तो आगामी चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी के लिए अपनी सीटें बचा पाना भी मुश्किल हो जाएगा। फिलहाल, पंजाब की राजनीति में आम आदमी पार्टी का पलड़ा सबसे भारी नजर आ रहा है।