सीएम भजनलाल ने दिए आर-पार के आदेश, अब नौजवानों के सपनों से नहीं होगा खिलवाड़
News India Live, Digital Desk : राजस्थान का वह छात्र जो कड़ी धूप में पसीना बहाकर, रोटियाँ बेलकर और एक छोटे से कमरे में बंद होकर परीक्षा की तैयारी करता है, उसके लिए सबसे बड़ा दुख तब होता है जब पता चलता है कि जिस 'पेपर' के लिए उसने सालों लगा दिए, वह पहले ही बिक चुका है। पेपर लीक माफियाओं ने पिछले कुछ सालों में राजस्थान के भविष्य यानी यहाँ के युवाओं के मनोबल को बहुत तोड़ा।
लेकिन, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अब इसे अपनी प्राथमिकता पर ले चुके हैं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि SIT (एसआईटी) की टीम न केवल नए गिरोहों पर नज़र रखेगी, बल्कि पुराने माफियाओं को भी ढूंढ-ढूंढकर उनके असली ठिकाने (जेल) तक पहुँचाएगी। मुख्यमंत्री का मानना है कि परीक्षा सिस्टम को इतना पारदर्शी होना चाहिए कि कोई अपराधी सेंध लगाने की सोच भी न सके।
अवैध घुसपैठियों पर भी टेढ़ी हुई नज़र
सुरक्षा के मोर्चे पर भी सरकार ने अब ढिलाई छोड़ दी है। राजस्थान के कई शहरों से ऐसी खबरें आ रही थीं जहाँ बिना किसी वैध दस्तावेज़ के बाहरी लोग अपनी पहचान छिपाकर रह रहे थे। राज्य की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए सीएम ने पुलिस और प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में रह रहे अवैध विदेशी नागरिकों (जैसे रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिये) की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
यह कदम न केवल सुरक्षा के लिहाज से ज़रूरी है, बल्कि अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री का कहना है कि राजस्थान की धरती पर हर उस शख्स का स्वागत है जो कानून का पालन करता है, लेकिन पहचान छिपाकर शांति भंग करने वालों के लिए कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
कैसा है जनता का रुख?
30 दिसंबर 2025 की इन सर्द दोपहरियों के बीच, सड़कों और चाय की दुकानों पर लोग सीएम के इन फैसलों की चर्चा कर रहे हैं। आम आदमी इस बात से खुश है कि सरकार सिर्फ़ योजनाएँ नहीं बना रही, बल्कि अपराधी और घुसपैठियों को उनकी जगह दिखा रही है। अपराध मुक्त राजस्थान की दिशा में यह 'भजनलाल सरकार' का अब तक का सबसे प्रभावी और 'दमदार' कदम बताया जा रहा है।
अगले साल, यानी 2026 की शुरुआत के साथ यह देखना दिलचस्प होगा कि ये सख्त फैसले राजस्थान की कानून व्यवस्था को कितने नए आयाम पर ले जाते हैं। फिलहाल, माफियाओं और असामाजिक तत्वों की नींद उड़ी हुई है।