रांची के एदलहातू और कई इलाकों में सड़कों का बुरा हाल, नगर निगम के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा

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News India Live, Digital Desk: झारखंड की राजधानी रांची के निवासी इन दिनों अपनी बुनियादी सुविधाओं को लेकर बेहद आक्रोशित हैं। 'हिन्दुस्तान' के विशेष अभियान 'बोले रांची' के तहत एदलहातू के शिवाजी और स्वामी विवेकानंद पथ में आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय लोगों ने नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। निवासियों का कहना है कि वे नियमित रूप से टैक्स का भुगतान करते हैं, लेकिन बदले में उन्हें जर्जर सड़कें, अंधेरी गलियां और गंदगी का अंबार मिल रहा है।

3 साल से जर्जर सड़कें, हर दिन हो रहे हादसे

एदलहातू इलाके की सड़कों की हालत इतनी खराब है कि पिछले तीन वर्षों से इनकी मरम्मत नहीं हुई है।

गड्ढों में तब्दील सड़कें: स्थानीय लोगों के मुताबिक, सड़कों पर इतने बड़े गड्ढे हैं कि बरसात के दिनों में वहां जलजमाव हो जाता है, जिससे पैदल चलना भी दूभर है।

बीमारियों का घर: जलजमाव और नालियों की सफाई न होने के कारण इलाके में मच्छर बढ़ गए हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

स्ट्रीट लाइट का अभाव: शाम ढलते ही अधिकांश स्ट्रीट लाइटें बंद रहती हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर महिलाओं और बुजुर्गों में डर बना रहता है।

कचरा प्रबंधन फेल: आवारा कुत्तों का आतंक

स्थानीय नागरिकों ने डोर-टू-डोर कचरा उठाव की अनियमितता पर भी नाराजगी जताई।

कूड़े का अंबार: समय पर कचरा न उठने से मोहल्ले के मोड़ और खाली प्लॉट डंपिंग यार्ड बन गए हैं।

सड़कों पर कुत्ते: गंदगी के कारण आवारा कुत्तों का जमावड़ा बढ़ गया है, जो बच्चों और राहगीरों के लिए खतरा बन गए हैं।

पेयजल संकट: कई इलाकों में सप्लाई का पानी नहीं पहुँच रहा है, जिससे लोग निजी बोरिंग या टैंकरों पर निर्भर हैं।

'बोले रांची' में जनता के 5 प्रमुख सुझाव:

सड़क मरम्मत: नगर निगम जल्द से जल्द जर्जर सड़कों का पुनर्निर्माण कराए।

नियमित सफाई: कचरा उठाव की गाड़ी रोजाना मोहल्लों में आए।

फॉगिंग की मांग: बीमारियों को रोकने के लिए नियमित फॉगिंग और कीटनाशक का छिड़काव हो।

स्ट्रीट लाइट ठीक हों: अंधेरे वाले रास्तों पर नई लाइटें लगाई जाएं।

जनप्रतिनिधियों की सक्रियता: वार्ड स्तर पर समस्याओं की सुनवाई के लिए ठोस व्यवस्था बने।

रांची के मध्यमवर्गीय परिवारों का कहना है कि राजधानी होने के बावजूद अगर उन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो यह व्यवस्था की विफलता है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।