Jharkhand : देवघर की शांति को किसकी नज़र लगी? मंदिर के काम पर क्यों हुआ बवाल और अब क्या हैं हालात?

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News India Live, Digital Desk: झारखंड के देवघर का नाम सुनते ही मन में एक ही बात आती है  शांति, सुकून और 'बाबा बैद्यनाथ' की अटूट आस्था। देवघर वो जगह है जो दुनिया भर को भक्ति और मेल-मिलाप का संदेश देती है। लेकिन पिछले कुछ घंटों से यहाँ के एक इलाके से जो खबरें आ रही हैं, उन्होंने हर किसी का दिल दुखा दिया है।

दरअसल, मंदिर के जीर्णोद्धार (Renovation) को लेकर शुरू हुई एक छोटी सी बात ने देखते ही देखते दो समुदायों के बीच एक बड़ा विवाद पैदा कर दिया। चलिए जानते हैं आखिर सच क्या है और फ़िलहाल वहाँ का क्या माहौल है।

मामला आखिर कहाँ से बिगड़ा?
घटना देवघर के एक खास मोहल्ले की है, जहाँ एक मंदिर के नवीनीकरण यानी मरम्मत का काम चल रहा था। स्थानीय लोगों की मानें तो काम के दौरान ही कुछ बातों को लेकर कहा-सुनी शुरू हुई। शुरू में जो बहस आम लग रही थी, उसने अचानक उग्र रूप ले लिया और दोनों तरफ से पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस अफरा-तफरी में अब तक करीब 7 लोगों के घायल होने की खबर मिली है।

धैर्य की जगह नफरत ने ले ली
दुख की बात ये है कि देवघर जैसे शहर में, जहाँ हर कोई एक-दूसरे के सहयोग से त्यौहार मनाता है, वहाँ आस्था के ही एक मुद्दे पर इतनी हिंसा हो गई। मौके पर हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि प्रशासन को फौरन बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात करना पड़ा। कई घंटों की मशक्कत के बाद अब वहाँ स्थिति काबू में बताई जा रही है।

पुलिस और प्रशासन का कड़ा रुख
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने उपद्रव करने वाले लोगों की पहचान शुरू कर दी है। इलाके में शांति मार्च निकाला गया है और बड़े अफसरों ने साफ़ कहा है कि "जो भी भाईचारा बिगाड़ने की कोशिश करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।" धारा-144 जैसी पाबंदियां भी लगाई गई हैं ताकि लोग अनावश्यक रूप से भीड़ न लगाएं।

क्या है हमारा फर्ज़?
एक नागरिक के तौर पर हमें यह समझने की ज़रूरत है कि ईंट-पत्थर के ढांचे तो वापस बन जाएंगे, लेकिन अगर पड़ोसियों के बीच की मोहब्बत खत्म हो गई, तो उसे जोड़ना नामुमकिन होगा। ऐसी खबरों के बाद अक्सर सोशल मीडिया पर अफवाहों का दौर शुरू हो जाता है, जिससे हमें बचना चाहिए। किसी भी संवेदनशील खबर को बिना सोचे-समझे शेयर करना नफरत की आग में घी डालने जैसा है।

बाबा नगरी में इस वक्त जो शांति की जरूरत है, वह पुलिस से ज्यादा वहां के लोगों की आपसी समझ से ही आ सकती है। उम्मीद है कि देवघर जल्द ही अपने पुराने खुशमिजाज़ और शांत रूप में वापस लौटेगा।

आपका इस पूरी घटना पर क्या सोचना है? क्या आपको भी लगता है कि बातचीत से ऐसी बड़ी लड़ाइयाँ रोकी जा सकती थीं? कमेंट्स में अपने विचार ज़रूर साझा करें।