रास्ता भटक रही हैं जीवनरक्षक गाड़ियां राजस्थान में 108 एंबुलेंस का जीपीएस फेल, मरीजों की जान पर बनी

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News India Live, Digital Desk : किसी बीमार या घायल व्यक्ति के लिए एंबुलेंस की अहमियत 'संजीवनी' जैसी होती है। एक कॉल और गाड़ी हाज़िर। लेकिन जरा सोचिए, आपने एंबुलेंस को फोन किया, वो निकली भी, लेकिन आपके घर तक पहुँचने का रास्ता ही नहीं ढूंढ पा रही है। यह खौफनाक मंजर राजस्थान के कई जिलों में देखने को मिल रहा है।

खबर आ रही है कि प्रदेश की लाइफलाइन मानी जाने वाली 108 और 104 एंबुलेंस सेवाओं में लगा GPS सिस्टम (Global Positioning System) काम नहीं कर रहा है या उसमें बड़ी तकनीकी दिक्कत आ गई है।

आखिर दिक्कत क्या है?

आमतौर पर जब आप कंट्रोल रूम में फोन करते हैं, तो आपकी लोकेशन जीपीएस के ज़रिए एंबुलेंस के पास पहुँच जाती है। इससे ड्राइवर बिना समय गंवाए आप तक पहुँचता है। लेकिन सिस्टम में आए ग्लिच (Glitch) की वजह से एंबुलेंस चालकों को मरीज की सही लोकेशन नहीं मिल पा रही है।

नतीजा? ड्राइवर को बार-बार फोन करके मरीज के परिजनों से रास्ता पूछना पड़ रहा है।
"भाई साहब, नीम के पेड़ से दाएं मुड़ना है या बाएं?"—इमरजेंसी के हालात में ऐसे सवाल किसी का भी बीपी बढ़ा सकते हैं।

'गोल्डन आवर' हो रहा बर्बाद

मेडिकल साइंस में किसी भी हादसे या हार्ट अटैक के बाद के पहले एक घंटे को 'गोल्डन आवर' (Golden Hour) कहते हैं। अगर इस समय इलाज मिल जाए, तो जान बच सकती है। लेकिन जीपीएस फेल होने से एंबुलेंस को पहुंचने में 15 से 20 मिनट की देरी हो रही है। यह देरी किसी की जान पर भारी पड़ सकती है।

ड्राइवरों का कहना है कि उनके टैबलेट या स्क्रीन पर लोकेशन अपडेट नहीं हो रही, जिससे वे खुद परेशान हैं। रात के वक्त तो गली-मोहल्लों में रास्ता खोजना और भी मुश्किल हो जाता है।

अब क्या करें आम जनता?

जब तक यह तकनीकी खामी ठीक नहीं होती, हमें थोड़ी होशियारी दिखानी होगी।
अगर आप एंबुलेंस बुलाते हैं:

  1. लोकेशन शेयर करें: ड्राइवर का पर्सनल नंबर मांगें और उसे वॉट्सऐप (WhatsApp) पर अपनी 'Live Location' भेज दें।
  2. लैंडमार्क बताएं: अपने घर के पास का कोई मशहूर लैंडमार्क (मंदिर, स्कूल या बड़ी दुकान) कंट्रोल रूम को साफ-साफ बताएं।
  3. सड़क पर रहें: संभव हो तो घर के किसी सदस्य को मुख्य सड़क पर खड़ा कर दें ताकि वो एंबुलेंस को गाइड कर सके।

तकनीक सुविधाओं के लिए है, लेकिन जब वह फेल हो जाए, तो हमारी सूझबूझ ही काम आती है। उम्मीद है प्रशासन जल्द ही इस 'कनेक्शन' को जोड़ेगा ताकि किसी की सांसें न टूटें।