ज़ुकरबर्ग की नींद उड़ाने वाला मामला, 19 साल की लड़की ने यूट्यूब, इंस्टाग्राम और टिकटॉक को क्यों खींचा कोर्ट?

Post

News India Live, Digital Desk: इंटरनेट की दुनिया, खासकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आज हर उम्र के लोग, ख़ासकर युवा घंटों बिताते हैं। लेकिन यही प्लेटफॉर्म्स कब लत (Addiction) में बदल जाते हैं, पता ही नहीं चलता। अमेरिका में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसने दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों को हिलाकर रख दिया है।

यह केस मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) को नुकसान पहुंचाने से जुड़ा है और इसमें मेटा (Meta - फेसबुक, इंस्टाग्राम), गूगल (Google - यूट्यूब) और टिकटॉक (TikTok) जैसी दिग्गज कंपनियों पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने अपने प्लेटफॉर्म्स को जानबूझकर इतना एडिक्टिव बनाया है कि ये युवाओं के दिमाग और सेहत को बर्बाद कर रहे हैं।

19 साल की लड़की और सोशल मीडिया का शिकार

इस कानूनी लड़ाई का नेतृत्व 19 साल की यैसमिन सेदान (Yasmin Saidane) कर रही हैं। यैसमिन ने अदालत में दावा किया है कि:

  1. खाने की बीमारी (Eating Disorder): यैसमिन ने बताया कि जब वह टीनएजर थीं, तब वह अनियंत्रित तरीके से खाने की आदतों से जूझने लगीं (ईटिंग डिसऑर्डर)। इसके लिए उन्होंने सोशल मीडिया पर मौजूद 'बॉडी इमेज' से जुड़े टॉक्सिक कंटेंट और एल्गोरिदम को दोषी ठहराया, जिसने उन्हें गलत तरह की वीडियो बार-बार दिखाईं।

यह सिर्फ यैसमिन का मामला नहीं है। यह कानूनी मुकदमा उन सैकड़ों अन्य अमेरिकी युवाओं और उनके माता-पिता के दावे पर आधारित है जो कहते हैं कि सोशल मीडिया लत के कारण उनके बच्चों को एंजाइटी (Anxiety), डिप्रेशन (Depression) और कई मानसिक बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।

क्या कोर्ट में मार्क ज़ुकरबर्ग को पेश होना पड़ेगा?

यैसमिन और अन्य शिकायतकर्ताओं ने ज़ुकरबर्ग को अदालत में गवाही देने के लिए मजबूर करने की मांग की है। हालांकि, यह मामला अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन अगर कोर्ट उन्हें गवाही के लिए बुलाता है, तो यह सोशल मीडिया जगत के लिए एक अभूतपूर्व घटना होगी।

तकनीकी निर्भरता और मानसिक स्वास्थ्य का भविष्य

यह मुकदमा सिर्फ पैसे या मुआवज़े के लिए नहीं है। यह एक बड़ा कदम है जो टेक कंपनियों को उनके उत्पादों के बुरे असर के लिए जिम्मेदार ठहराता है। पिछले साल कई अमेरिकी सीनेटर्स ने इन कंपनियों के प्रमुखों की तीखी आलोचना की थी और उनसे 'डिजिटल जहर' फैलाना बंद करने को कहा था।

अगर यह केस युवाओं के पक्ष में जाता है, तो इन कंपनियों को अपने एडिक्टिव एल्गोरिदम और प्लेटफॉर्म की डिज़ाइन में बहुत बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।