राजस्थान के कोरोना घोटाले की कहानी सुन आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे ,2000 करोड़ की वह FIR
News India Live, Digital Desk: क्या आपको याद है 2020 और 2021 का वो दौर? जब एम्बुलेंस के सायरन और अपनों को खोने का डर हमारे दिलों में घर कर गया था। उस वक्त पूरा देश और राजस्थान के लोग सिर्फ अपनी और अपने परिवार की सलामती की दुआ मांग रहे थे। लेकिन क्या आप यकीन करेंगे कि जब आम इंसान एक-एक सांस के लिए संघर्ष कर रहा था, तब सिस्टम में बैठे कुछ सफेदपोश लोग भ्रष्टाचार की एक 'बड़ी डील' को अंजाम देने में जुटे थे?
राजस्थान से आई ताज़ा खबर ने पूरे प्रदेश को सन्न कर दिया है। एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने आखिरकार कोरोना काल में हुए ₹2000 करोड़ के बड़े घोटाले (Rajasthan COVID Scam) के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। यह घोटाला न सिर्फ पैसों की बंदरबांट है, बल्कि उन हजारों लोगों के भरोसे के साथ भी खिलवाड़ है जिन्होंने सरकारी सिस्टम पर यकीन किया था।
कैसे खेला गया ₹2000 करोड़ का ये 'खूनी' खेल?
एसीबी की अब तक की जांच और रिपोर्ट में जो बातें सामने आई हैं, वो सच में परेशान करने वाली हैं। बताया जा रहा है कि उस दौर में जब दवाइयों, मास्क, पीपीई किट और मेडिकल उपकरणों की सख्त ज़रूरत थी, तब टेंडर की प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर चहेती कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट दिए गए।
जो चीजें शायद बहुत कम दाम पर मिल सकती थीं, उन्हें आपदा के नाम पर कई गुना ऊंचे रेट पर खरीदा गया। सूत्रों की मानें तो बिना किसी पारदर्शी तरीके के सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये उन कंपनियों के बैंक खातों में भेजे गए जिनका दूर-दूर तक मेडिकल सप्लाई से कोई अनुभव ही नहीं था।
किसकी है ये जवाबदेही? (ACB FIR 2026 Updates)
घोटाले का यह पहाड़ तत्कालीन सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। भ्रष्टाचार के इस मकड़जाल में न सिर्फ विभाग के अधिकारी, बल्कि कुछ बड़े राजनीतिक चेहरों के शामिल होने का भी अंदेशा जताया जा रहा है। यही वजह है कि 2026 की शुरुआत के साथ ही इस पर एसीबी ने अपनी गिरफ्त कसना शुरू कर दिया है।
अदालत के निर्देश और लगातार आ रही शिकायतों के बाद, ACB ने उन सभी कड़ियों को जोड़ना शुरू किया है जिनके तार सीधे जयपुर से लेकर दिल्ली तक फैले हुए हैं।
जनता के हक का पैसा और सियासी हलचल
यह मामला सिर्फ कानूनी पन्नों तक सीमित नहीं रहने वाला है। राजस्थान की राजनीति में अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। विपक्षी दल इसे "शव पर राजनीति और व्यापार" का नाम दे रहे हैं, वहीं जांच एजेंसियां पुरानी फाइलों को फिर से खंगाल रही हैं। ₹2000 करोड़ का आंकड़ा इतना बड़ा है कि इसने न केवल प्रदेश के बजट पर चोट की, बल्कि उस वक्त की व्यवस्था की पोल भी खोल दी है।
अब आगे क्या?
FIR दर्ज होने का मतलब है कि अब गिरफ्तारियों का सिलसिला भी जल्द शुरू हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि जब रसूखदारों के नाम इस घोटाले में उछलेंगे, तब सिस्टम उन्हें बचाएगा या फिर सच में दूध का दूध और पानी का पानी होगा।
हम सब यही उम्मीद करते हैं कि उन ₹2000 करोड़ रुपयों का एक-एक हिसाब जनता के सामने आए। यह पैसा उन करदाताओं का है जो ईमानदारी से अपनी कमाई का हिस्सा देश की प्रगति के लिए देते हैं। इस घोटाले की जांच को दबाया न जाए, ताकि भविष्य में फिर कभी किसी आपदा को लूटने का अवसर कोई न खोज सके।
आप इस ₹2000 करोड़ के खुलासे के बारे में क्या सोचते हैं? अपनी राय हमें जरूर बताएं।