रोहित शर्मा के सामने तुम कुछ भी नहीं टीम इंडिया के कोच को ये किसने दिखा दिया आईना? 5% वाले बयान से मचा हड़कंप
News India Live, Digital Desk: भारतीय क्रिकेट में आजकल जो चल रहा है, उसे देखकर लगता है कि मैदान के बाहर का खेल मैदान के अंदर से ज्यादा रोमांचक हो गया है। हाल ही में टीम इंडिया के प्रदर्शन और फैसलों को लेकर काफी सवाल उठ रहे हैं। लेकिन अब बात "खेल" से बढ़कर "रुतबे" और "साख" पर आ गई है।
ताजा मामला टीम इंडिया के हेड कोच और कप्तान रोहित शर्मा की तुलना से जुड़ा है। एक बड़े बयान ने क्रिकेट जगत में खलबली मचा दी है। बात सीधी और चुभने वाली कही गई है कि कोच साहब ने अपनी पूरी जिंदगी में जो कमाया है, वो रोहित शर्मा की सफलता के 5% (पाँच फीसदी) के बराबर भी नहीं है!
क्यों उठी ऐसी बात?
हम सब जानते हैं कि रोहित शर्मा ने भारतीय टीम को किस मुकाम पर पहुँचाया है। टी-20 वर्ल्ड कप की जीत हो या आईपीएल में पांच ट्रॉफियां, 'हिटमैन' का रिकॉर्ड बोलता है। ऐसे में जब टीम बुरे दौर से गुजरती है या हारती है, तो अक्सर कोच की नई नीतियां और प्रयोग सवालों के घेरे में आ जाते हैं।
हाल ही में किसी दिग्गज ने कोच को सीधे तौर पर लताड़ लगाई है। उनका कहना है कि कोच को अपनी "सीमा" पता होनी चाहिए। आप रोहित शर्मा जैसे कद के खिलाड़ी को यह नहीं सिखा सकते कि मैच कैसे जीता जाता है, खासकर तब जब बतौर खिलाड़ी या कप्तान आपकी खुद की उपलब्धियां रोहित के सामने फीकी लगती हों।
रोहित का कद और कोच का पद
अक्सर देखा गया है कि जब भी कोई नया कोच आता है, तो वो अपना एक अलग स्टाइल थोपने की कोशिश करता है। इसे कई बार "ईगो की लड़ाई" (Ego Clash) भी कहा जाता है। आलोचकों का मानना है कि रोहित शर्मा इस वक्त अपने करियर के उस पड़ाव पर हैं जहाँ उन्हें "ज्ञान" की नहीं, बल्कि "सहयोग" की जरूरत है।
यह '5%' वाला ताना सिर्फ एक नंबर नहीं है, बल्कि यह उस गुस्से का इजहार है जो फैंस और पुराने खिलाड़ियों के मन में चल रहा है। इसका सीधा मतलब है—कि भाई, कप्तान बड़ा होता है और उसका सम्मान सबसे ऊपर होना चाहिए।
ड्रेसिंग रूम की हलचल
भले ही खिलाड़ी और स्टाफ कैमरे के सामने मुस्कुराते हुए दिखें, लेकिन ऐसे बयानों से ड्रेसिंग रूम के अंदर की खदबदाहट का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह बयान यह भी इशारा करता है कि शायद सब कुछ "ऑल इज वेल" नहीं है। अब देखना यह होगा कि कोच इस आलोचना को कैसे लेते हैं चुप रहकर काम से जवाब देते हैं, या फिर यह विवाद और तूल पकड़ता है।
फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि भारतीय क्रिकेट में 'सम्मान' की यह लड़ाई अभी लंबी चलने वाली है।