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1,569 दिनों से जारी महाविनाश के बीच यूक्रेन के घातक ड्रोन हमलों ने उड़ाई पुतिन की नींद

वैश्विक भू-राजनीति और आधुनिक सैन्य इतिहास में एक ऐसा चौंकाने वाला और भयावह मोड़ आ चुका है, जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को हैरत में डाल दिया है। फरवरी 2022 से शुरू हुआ रूस-यूक्रेन युद्ध अब समय के मामले में मानव इतिहास के सबसे विनाशकारी संघर्षों में से एक 'प्रथम विश्वयुद्ध' (World War I) की समय अवधि को भी पार कर गया है। करीब 52 महीनों से लगातार जारी यह भीषण युद्ध आज 1,569 दिनों के एक ऐसे आंकड़े पर पहुंच चुका है, जिसकी कल्पना शायद खुद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी नहीं की थी। हालांकि, राहत की बात सिर्फ इतनी है कि महाविनाश के इस दौर में दोनों विश्वयुद्धों की तुलना में इंसानी जानों का नुकसान थोड़ा कम हुआ है, लेकिन यूक्रेन द्वारा किए जा रहे अत्याधुनिक और घातक ड्रोन हमलों ने इस जंग को पूरी तरह से 'डिजिटल और अनप्रेडिक्टेबल' बना दिया है। संपादनकर्ता साक्षी गुप्ता की इस विशेष वैश्विक रिपोर्ट में जानिए कि कैसे यह युद्ध अब इतिहास के पन्नों को दोबारा लिख रहा है।

224 हफ्तों से जारी महायुद्ध ने तोड़ा 108 साल पुराना रिकॉर्ड, जानिए प्रथम विश्वयुद्ध से कितनी बड़ी है यह जंग

यदि हम इतिहास के पन्नों को पलटें तो पाएंगे कि साल 1914 से नवंबर 1918 के बीच लड़ा गया प्रथम विश्वयुद्ध कुल 224 हफ्तों यानी ठीक 1,568 दिनों तक चला था। तत्कालीन समय में जर्मनी और फ्रांस की आपसी दुश्मनी से शुरू हुई उस आग ने धीरे-धीरे कई महाद्वीपों को अपनी चपेट में ले लिया था, जिसमें दो करोड़ से अधिक सैनिकों और आम नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। वहीं, साल 1939 से 1945 तक छह वर्षों तक चले द्वितीय विश्वयुद्ध में सात करोड़ से ज्यादा लोग मारे गए थे। वर्तमान में जारी रूस-यूक्रेन युद्ध ने खूनखराबे के मामले में भले ही उन दोनों विश्वयुद्धों का मुकाबला न किया हो, लेकिन समय के मामले में यह प्रथम विश्वयुद्ध से भी आगे निकल चुका है और लगातार जारी है।

दोनों देशों ने छिपाई अपने मृत सैनिकों की असली संख्या, खुफिया रिपोर्टों में हुआ बड़ा अनुमान

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स और वैश्विक खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, युद्धरत दोनों ही देश यानी रूस और यूक्रेन अंतरराष्ट्रीय दबाव और अपने देश की जनता के मनोबल को बनाए रखने के लिए मारे गए सैनिकों की सटीक संख्या को लगातार दुनिया से छिपा रहे हैं। सैन्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि पिछले चार से अधिक वर्षों की इस भीषण जंग में दोनों तरफ के मिलाकर अब तक लगभग दस लाख से कम लोग ही मारे गए हैं या गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हालांकि, जान-माल का यह नुकसान विश्वयुद्धों जितना बड़ा नहीं है, लेकिन दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को इस जंग ने पूरी तरह से तहस-नहस कर के रख दिया है।

क्रीमिया को रूस से पूरी तरह अलग-थलग करने का मास्टर प्लान, यूक्रेनी ड्रोन कमांडरों ने बिछाया जाल

इस समय युद्ध के मैदान से जो सबसे बड़ी रणनीतिक खबर आ रही है, वह यूक्रेन के खतरनाक ड्रोन ऑपरेशन्स से जुड़ी है। यूक्रेनी सेना के ड्रोन कमांडरों ने अब एक बेहद खुफिया और आक्रामक मास्टर प्लान पर काम करना शुरू कर दिया है। यूक्रेन का मुख्य लक्ष्य किसी भी तरह से रूस से क्रीमिया (Crimea) प्रायद्वीप को होने वाली हथियारों, रसद और ईंधन की मुख्य सैन्य आपूर्ति व्यवस्था (सप्लाई लाइन) को पूरी तरह से ठप और बाधित करना है। यूक्रेन की रणनीति यह है कि यदि क्रीमिया में मौजूद रूसी सेना को मुख्य भूमि से अलग-थलग कर दिया जाए, तो यूक्रेनी पैदल सैनिक बड़े पैमाने पर जमीनी हमला बोलकर क्रीमिया को रूसी कब्जे से पूरी तरह मुक्त करा सकते हैं।

बीते 12 महीनों में रूसी सेना की टूटी कमर, कुल नुकसान का एक तिहाई हिस्सा सिर्फ ड्रोन हमलों की देन

यूक्रेन ने अपने इसी मास्टर प्लान के तहत पिछले कुछ महीनों में क्रीमिया के भीतर मौजूद रूसी सैन्य ठिकानों, तेल डिपो और रसद गोदामों पर आत्मघाती ड्रोन हमले कई गुना बढ़ा दिए हैं। इस रणनीति का असर भी अब साफ दिखाई देने लगा है। वाशिंगटन की रक्षा रिपोर्टों के अनुसार, पिछले चार वर्षों से जारी इस पूरी जंग में रूसी सेना को जितना भी कुल नुकसान हुआ है, उसका लगभग एक-तिहाई (33%) हिस्सा रूस को केवल पिछले 12 महीनों के भीतर झेलना पड़ा है, और यह भारी नुकसान पूरी तरह से यूक्रेन के सटीक ड्रोन हमलों की वजह से हुआ है। अब देखना यह है कि इतिहास के इस सबसे लंबे आधुनिक युद्ध का अंत बातचीत की मेज पर होता है या फिर परमाणु हथियारों की धमकियों के बीच दुनिया एक और बड़े संकट की तरफ बढ़ती है।

 

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