एक ही अमेरिकी कंपनी भारत और पाकिस्तान दोनों को बेचेगी घातक ड्रोन, डील पर मचा वैश्विक बवाल

एक ही अमेरिकी कंपनी भारत और पाकिस्तान दोनों को बेचेगी घातक ड्रोन, डील पर मचा वैश्विक बवाल

अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति और रक्षा व्यापार के गलियारों में एक चौंकाने वाला और संवेदनशील घटनाक्रम सामने आया है, जिसने सामरिक विशेषज्ञों के कान खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार से वित्तीय रूप से जुड़ी एक नवोदित डिफेंस टेक कंपनी 'पावरस' (Powerus) ने भारत और पाकिस्तान—दोनों पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी देशों—के साथ एक साथ आधुनिक सैन्य ड्रोन का व्यापार शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी फर्म पावरस के साथ अत्याधुनिक मानव रहित हवाई प्रणाली यानी अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAS) और संबंधित तकनीकी सहायता खरीदने के लिए एक औपचारिक खरीद आदेश जारी किया है तथा इस संबंध में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

इस सौदे की सबसे विवादास्पद और पेचीदा बात यह है कि पाकिस्तान के साथ इस रक्षा सौदे पर मुहर लगाने से महज तीन महीने पहले, इसी अमेरिकी कंपनी पावरस ने भारत की प्रतिष्ठित रक्षा निर्माता कंपनी पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज (Paras Defence) के साथ एक बड़ा रणनीतिक करार किया था। उस करार के तहत पावरस ने अपने बहुचर्चित 'गार्डियन-1' (Guardian-1) इंटरसेप्टर ड्रोन को भारत में ही स्वदेशी रूप से निर्मित करने और भारतीय सशस्त्र बलों को बेचने का विशेष एक्सक्लूसिव लाइसेंस प्रदान किया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि जो कंपनी भारत में काउंटर-ड्रोन और इंटरसेप्टर तकनीक दे रही है, वही कंपनी सीमा पार पाकिस्तान की सेना को निगरानी और हमलावर ड्रोन तकनीक कैसे मुहैया करा सकती है।

ट्रंप के बेटों का निवेश और फ्लोरिडा हेडक्वार्टर: विवादों के घेरे में आई पावरस कंपनी

पावरस एक बेहद नई रक्षा उपकरण निर्माता कंपनी है, जिसे वर्ष 2025 में स्थापित किया गया था और इसका मुख्य कॉर्पोरेट मुख्यालय अमेरिका के फ्लोरिडा में स्थित है। इस कंपनी के मालिकाना हक और वित्तीय ढांचे को लेकर सबसे ज्यादा सुर्खियां इसलिए बन रही हैं क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोनों प्रमुख बेटे—डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप—इसमें प्रमुख वित्तीय निवेशक (Investors) के रूप में जुड़े हुए हैं। हालांकि, रक्षा सौदे पर अंतरराष्ट्रीय विवाद गहराने के बाद कंपनी प्रबंधन ने अपनी ओर से स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि ट्रंप बंधु केवल निष्क्रिय वित्तीय निवेशक हैं और वे कंपनी के दैनिक संचालन, बोर्ड के तकनीकी निर्णयों या रणनीतिक सौदों के क्रियान्वयन में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं हैं।

इसके बावजूद, कूटनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या व्हाइट हाउस के राजनीतिक प्रभाव का उपयोग दक्षिण एशिया में हथियारों का समानांतर बाजार खड़ा करने के लिए किया जा रहा है। कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ अपनी उच्चस्तरीय बैठक की आधिकारिक तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि पावरस को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय से ड्रोन सिस्टम और तकनीकी सहायता का पहला सीमित खरीद आदेश प्राप्त हुआ है। कंपनी का दावा है कि यह ऑर्डर अंतरराष्ट्रीय रक्षा व्यापार के विस्तार की दिशा में एक सामान्य व्यावसायिक कदम है, लेकिन नई दिल्ली से लेकर वाशिंगटन तक इसे संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है।

इजरायली कनेक्शन और पाकिस्तान का विरोधाभास: जिसे देश नहीं मानता, उसके पूर्व सैनिक से खरीद रहा हथियार

इस पूरे रक्षा सौदे का एक और बेहद हैरान करने वाला और विरोधाभासी पहलू इसका इजरायली कनेक्शन है। पावरस कंपनी के सह-संस्थापक जिव मारोम (Ziv Marom) इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के पूर्व सैनिक और रक्षा तकनीक विशेषज्ञ रहे हैं। यह सर्वविदित तथ्य है कि पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर इजरायल को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं देता और दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार के राजनयिक संबंध नहीं हैं। पाकिस्तान की घरेलू राजनीति में इजरायल विरोध हमेशा एक बड़ा भावनात्मक और धार्मिक मुद्दा रहा है। ऐसे में एक पूर्व इजरायली सैन्य अधिकारी द्वारा सह-स्थापित कंपनी से पाकिस्तानी सेना द्वारा ड्रोन तकनीक खरीदना इस्लामाबाद के कूटनीतिक दोहरेपन को पूरी तरह उजागर करता है।

सैन्य विश्लेषक इस बात पर भी हैरानी जता रहे हैं कि पाकिस्तान के पास पहले से ही स्वदेशी स्तर पर विकसित किए जा रहे 'शाहपर-2' (Shahpar-II) जैसे हथियारबंद ड्रोन मौजूद हैं। इसके अलावा पाकिस्तान लंबे समय से अपने सदाबहार दोस्त चीन से विंग लूम (Wing Loong) और तुर्की से बायरकतार टीबी-2 (Bayraktar TB2) और अकिंसी जैसे उन्नत लड़ाकू ड्रोन खरीदता रहा है। इन तमाम विकल्पों के मौजूद होने के बावजूद, एक अमेरिकी-इजरायली पृष्ठभूमि वाली नई नवेली फर्म से हथियार खरीदने का निर्णय यह साबित करता है कि इसके पीछे विशुद्ध सैन्य जरूरतों से कहीं अधिक कोई गुप्त भू-राजनीतिक समीकरण काम कर रहा है।

रक्षा जरूरत या राजनीतिक साधने का खेल? आसिम मुनीर और ट्रंप प्रशासन के रिश्तों पर एक्सपर्ट्स की राय

अंतरराष्ट्रीय मामलों और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पावरस के ड्रोन तकनीक के बुनियादी स्तर पर पाकिस्तान के पास पहले से ही चीनी और तुर्की प्लेटफॉर्म्स के जरिए पर्याप्त क्षमता मौजूद है। कुछ जानकारों का विश्लेषण है कि पाकिस्तानी सेना को हार्डवेयर से ज्यादा उन्नत अमेरिकी चिपसेट, सुरक्षित डेटा-लिंक, सिस्टम-लेवल इंटीग्रेशन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से निपटने वाली इलेक्ट्रॉनिक क्षमताओं की सख्त दरकार है, जिसमें पश्चिमी कंपनियां दुनिया में सबसे आगे मानी जाती हैं। पावरस के जरिए पाकिस्तानी सेना अमेरिकी तकनीक के इकोसिस्टम में फिर से घुसपैठ करने की कोशिश कर रही है।

वहीं दूसरी ओर, एक बड़ा कूटनीतिक वर्ग इसे रक्षा खरीद से ज्यादा एक सोची-समझी 'राजनीतिक लॉबिंग' और कूटनीतिक संकेत मान रहा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और ट्रंप परिवार के करीबी कारोबारी तंत्र के बीच संबंध सुधारने की यह एक परोक्ष कोशिश हो सकती है। ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से ही इस्लामाबाद यह प्रयास कर रहा है कि वह वाशिंगटन के साथ अपने पुराने सुरक्षा संबंधों को दोबारा पटरी पर लाए। हालांकि, एक ही अमेरिकी कंपनी द्वारा भारत में एंटी-ड्रोन सिस्टम बनाना और पाकिस्तान को ड्रोन बेचना सीधे तौर पर दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसियों के बीच रणनीतिक संतुलन को बिगाड़ने वाला खेल साबित हो सकता है, जिस पर आने वाले दिनों में भारत सरकार द्वारा कड़ी आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।