स्विट्जरलैंड के ग्लेशियरों पर मंडराया अस्तित्व का संकट: पिछले पांच वर्षों में पिघल गई पांचवें हिस्से से ज्यादा बर्फ
यूरोप और दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभाव अब बेहद भयानक रूप लेते जा रहे हैं। स्विस शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों द्वारा जारी की गई एक ताजा और चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के भीतर स्विट्जरलैंड के ग्लेशियरों का लगभग पांचवां हिस्सा कम हो चुका है। यह इस बात का स्पष्ट और अकाट्य प्रमाण है कि यूरोपीय महाद्वीप दुनिया में सबसे तेजी से गर्म होने वाले क्षेत्रों में शामिल है। अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में अल्पाइन ग्लेशियरों का अस्तित्व पूरी तरह से समाप्त हो सकता है।
अकेले 2026 में गायब हो गई पांच प्रतिशत से अधिक बर्फ
रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले साल 2026 के दौरान स्विट्जरलैंड की पांच प्रतिशत से अधिक बर्फ पूरी तरह से गायब हो चुकी है। सर्दियों के मौसम में सामान्य से बहुत कम बर्फबारी होने के बाद गर्मियों के दिनों में पड़ी भीषण और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की लहरों (Heatwaves) ने स्थिति को और अधिक बदतर बना दिया है। स्विस वैज्ञानिकों ने बताया है कि इस भयंकर पिघलाव के कारण कई छोटे ग्लेशियर तो पहले ही पूरी तरह से अस्तित्व खो चुके हैं।
स्विस ग्लेशियर मॉनिटरिंग नेटवर्क और आल्प्स क्रायोस्फीयर (Cryosphere) में होने वाले बदलावों का लगातार दस्तावेजीकरण करने वाले वैज्ञानिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मौजूदा पर्यावरणीय परिस्थितियों को देखते हुए अल्पाइन ग्लेशियरों के दीर्घकालिक अस्तित्व की अब कोई भी संभावना नजर नहीं आ रही है।
मानवजनित गतिविधियां और ग्लोबल वार्मिंग जिम्मेदार
स्विस ग्लेशियर मॉनिटरिंग नेटवर्क के प्रमुख मैथियास हस ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक तापमान में हुई इस अभूतपूर्व और चौंकाने वाली वृद्धि के लिए पूरी तरह से मानवीय गतिविधियां जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि हम वर्तमान में जिस वैश्विक तापमान में वृद्धि का सामना कर रहे हैं, उसका 100 प्रतिशत कारण मानवजनित जलवायु परिवर्तन (Anthropogenic Climate Change) ही है।
ब्रिटेन के न्यूकैसल विश्वविद्यालय में ग्लेसियोलॉजी की प्रोफेसर बेथन डेविस ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिमनदों का इतनी तेजी से पिघलना पूरी मानव जाति के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है। यह संकट न केवल केवल ग्लेशियरों के लिए, बल्कि उनके आसपास पर्वतीय क्षेत्रों में बसने वाले लाखों लोगों के लिए भी एक विकराल समस्या बनता जा रहा है।
पर्वतीय ढलानों में अस्थिरता और बढ़ती प्राकृतिक आपदाएं
शोधकर्ताओं का कहना है कि ग्लेशियरों के इस तरह लगातार पिघलने और बर्फ के कम होने से पर्वतीय क्षेत्रों में गंभीर खतरे पैदा हो रहे हैं। भारी मात्रा में बर्फ और ग्लेशियर पिघलने के कारण ऊंचे पर्वतीय ढलानें बेहद अस्थिर हो गई हैं, जिसके परिणामस्वरूप दुनिया भर में भूस्खलन, बाढ़ और अन्य विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं के मामलों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि समय रहते वैश्विक स्तर पर कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दशकों में इसके परिणाम और अधिक भयावह हो सकते हैं।