फ्लाईदुबई के ओमानी को-पायलट का सनसनीखेज खुलासा

फ्लाईदुबई के ओमानी को-पायलट का सनसनीखेज खुलासा

अंतरराष्ट्रीय विमानन जगत और खुफिया एजेंसियों को हिला देने वाले एक बेहद डरावने और चौंकाने वाले मामले में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ओर से एक बड़ा खुलासा किया गया है। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट (FZ1073) के दौरान कॉकपिट में हुए खौफनाक संघर्ष और हमले के मामले में गिरफ्तार किए गए ओमानी को-पायलट ने पूछताछ के दौरान ऐसे सनसनीखेज राज उगले हैं, जिसने सबको सकते में डाल दिया है। शुरुआती जांच और यूएई के Attorney-General द्वारा जारी आधिकारिक बयानों के मुताबिक, इस को-पायलट की खतरनाक साजिश अमेरिका में हुए इतिहास के सबसे भीषण 9/11 आतंकी हमलों से पूरी तरह प्रेरित थी। उसकी योजना फ्लाईदुबई के इस विमान को इजराइल के मुख्य बेन गुरियन एयरपोर्ट (Ben Gurion Airport) या वहां के व्यस्त पैसेंजर टर्मिनल पर विमान को सीधे क्रैश करके एक बहुत बड़ा आत्मघाती हमला करने की थी। इस चौंकाने वाले खुलासे ने मध्य पूर्व की उड़ानों की सुरक्षा और एयरलाइंस की रिक्रूटमेंट पॉलिसी पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फ्लाईदुबई फ्लाइट FZ1073 का खौफनाक सच और कॉकपिट के अंदर का संघर्ष

यह खौफनाक घटना दुबई से तेल अवीव जाने वाली उड़ान के दौरान आसमान में उस वक्त घटी जब विमान हजारों फीट की ऊंचाई पर सफर कर रहा था। फ्लाइट के सह-पायलट (को-पायलट) ने सुनियोजित तरीके से विमान के मुख्य कैप्टन पर अचानक इमरजेंसी कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला बोल दिया। इस अचानक हुए हमले से कॉकपिट खून से सन गया और विमान का संतुलन इस तरह बिगड़ा कि वह कुछ ही सेकंड में हजारों फीट नीचे की ओर तेजी से गोता खाने लगा। विमान में सवार यात्रियों के बीच चीख-पुकार मच गई क्योंकि किसी को समझ नहीं आ रहा था कि हवा में अचानक यह क्या तबाही आ गई है। हालांकि, घायल होने के बावजूद भारतीय मूल के सूझबूझ और साहस का परिचय देने वाले कैप्टन ने हिम्मत नहीं हारी और नीचे से कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे। इसके बाद विमान में सवार अन्य पायलट, क्रू मेंबर और कुछ सतर्क यात्रियों ने तत्परता दिखाते हुए हमलावर को दबोच लिया और विमान को सुरक्षित सऊदी अरब के ताबूक एयरपोर्ट की तरफ डायवर्ट कर लिया।

9/11 हमलों से प्रेरणा और ओमान से लेकर दुबई तक की खौफनाक साजिश

यूएई के अभियोजक जनरल (Attorney-General) की ओर से जारी रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि आरोपी को-पायलट की कट्टरपंथ की तरफ फिसलन साल 2017 के आसपास शुरू हुई थी, जब वह ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहा था। उस दौरान वह आतंकवादी संगठनों और चरमपंथी साहित्य के संपर्क में आया और अमेरिका में हुए 9/11 के हमलों से इस कदर प्रभावित हुआ कि उसके मन में भी उसी तर्ज पर किसी कमर्शियल विमान को हाइजैक कर तबाही मचाने का भूत सवार हो गया। अपनी इसी नापाक मंशा को अंजाम देने के लिए उसने बाकायदा एविएशन की ट्रेनिंग ली और पायलट बना। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि उसने खासतौर पर ऐसी एयरलाइंस की तलाश की थी जो इजराइल के तेल अवीव के लिए उड़ान भरती हैं, और इसी वजह से उसने जनवरी 2026 में फ्लाईदुबई एयरलाइन ज्वाइन की थी। इजराइल के रूट और एयरपोर्ट की भौगोलिक स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ होने के लिए उसने इस घटना से पहले भी दो उड़ानों का इस्तेमाल किया था।

एयरलाइंस की सुरक्षा व्यवस्था और वैटिंग प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

इस सनसनीखेज घटना के सामने आने के बाद वैश्विक स्तर पर एयरलाइंस की सुरक्षा जांच (Vetting Process) और पायलटों की पृष्ठभूमि के सत्यापन को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। जांच एजेंसियों ने यह पड़ताल शुरू कर दी है कि आखिर इतने बड़े सुरक्षा जोखिम और चरमपंथी सोच से जुड़ा व्यक्ति फ्लाईदुबई जैसी प्रतिष्ठित एयरलाइन के कॉकपिट तक पहुंचने में कैसे कामयाब हो गया। हालांकि, एयरलाइन अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने अपनी नियुक्ति के वक्त सभी आवश्यक पेशेवर लाइसेंस, क्लीन चिट और सुरक्षा संबंधी औपचारिकताओं को पूरा किया था, जिसके कारण उसकी पिछली गतिविधियों का पता नहीं चल सका। इस घटना ने साबित कर दिया है कि एविएशन सेक्टर में सुरक्षा के कड़े मानकों और मनोवैज्ञानिक परीक्षणों को और अधिक सख्त बनाने की कितनी जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी बड़ी मानवीय त्रासदी को समय रहते रोका जा सके।

टल गया एक बड़ा विमान हादसा, दुनिया भर की सुरक्षा एजेंसियों में हाई अलर्ट

गनीमत यह रही कि कैप्टन की बहादुरी और यात्रियों की सूझबूझ के कारण वक्त रहते इस बड़े आत्मघाती और आतंकी मंसूबे को नाकाम कर दिया गया, वरना इतिहास एक बार फिर 9/11 जैसे दर्दनाक जखم झेल सकता था। इस घटना के बाद से ही मध्य पूर्व और पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियां पूरी तरह से सतर्क हो गई हैं। इज़राइली सुरक्षा तंत्र और अंतरराष्ट्रीय विमानन प्राधिकरण भी इस बात की गहराई से समीक्षा कर रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सुरक्षा में इस प्रकार की चूक कैसे संभव हुई। आरोपी को-पायलट को हिरासत में ले लिया गया है और यूएई के कानून के तहत उसे सबसे कठोर यानी मौत की सजा दिए जाने की बात कही जा रही है। यह घटना पूरी दुनिया के एविएशन इतिहास में एक डरावने अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है, जो यह याद दिलाती है कि सतर्कता में ज़रा सी ढील कितनी भारी पड़ सकती है।