मोदी-जिनपिंग मुलाकात: ब्रिक्स में LAC और निवेश पर बड़ी डील की उम्मीद
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मंच पर आज वैश्विक कूटनीति का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु भारत और चीन के बीच होने वाली द्विपक्षीय बातचीत रहने वाली है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को दिल्ली पहुंच रहे हैं, जहां उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बहुप्रतीक्षित मुलाकात होगी। इस उच्चस्तरीय बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC के मुद्दों पर सीधी चर्चा की पूरी संभावना है। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच सीमा पर शांति बहाली और सैनिकों की संख्या में कमी लाने जैसे संवेदनशील विषयों पर सहमति बनने के कयास लगाए जा रहे हैं। नई दिल्ली में आयोजित हो रहे इस दो दिवसीय वैश्विक आयोजन के पहले दिन जहां बिजनेस फोरम में आर्थिक साझेदारी और व्यापारिक बाधाओं को दूर करने पर मंथन हुआ, वहीं दूसरे दिन आज कूटनीतिक वार्ताओं का दौर दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।
शुक्रवार को बिजनेस फोरम की बैठक के साथ शुरू हुए इस महाकुंभ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यापार से जुड़ी बढ़ती बाधाओं पर चिंता जाहिर करते हुए ब्रिक्स देशों के माध्यम से आपसी व्यापार को सुगम बनाने पर जोर दिया। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2014 के बाद से भारत ने लगभग 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों को बढ़ावा दिया है और ब्रिक्स के मंच पर भी यही प्रयास है कि कृषि, स्वास्थ्य, कौशल विकास तथा स्मार्ट ग्रिड जैसे क्षेत्रों में नए सहयोग नेटवर्क मजबूत किए जाएं। स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स इन्क्युबेटर नेटवर्क, एमएसएमई पोर्टल और स्टार्टअप इनोवेशन फंड जैसी पहलों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने सदस्य देशों के बीच निवेश और प्रतिभा के आदान-प्रदान को और अधिक तेज करने का आह्वान किया।
ब्रिक्स बिजनेस फोरम और वैश्विक आर्थिक एजेंडा
व्यापारिक संभावनाओं के इस दौर में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी ब्रिक्स देशों की आर्थिक ताकत की जमकर सराहना की और इसे वैश्विक विकास का नया इंजन करार दिया। पुतिन ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों की असली रीढ़ मजबूत और भरोसेमंद व्यापारिक रिश्ते ही होते हैं। दुनिया की अर्थव्यवस्था में आ रहे स्थायी बदलावों का जिक्र करते हुए उन्होंने माना कि पारंपरिक आर्थिक केंद्रों के पास मजबूत बुनियादी ढांचा और तकनीकी क्षमताएं मौजूद हैं, लेकिन वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में बदलाव की इस स्वाभाविक प्रक्रिया को अब रोका नहीं जा सकता। बिजनेस फोरम की इन बैठकों ने यह साफ कर दिया है कि सदस्य देश आपसी सहयोग के जरिए वैश्विक आर्थिक मंदी और व्यापारिक अवरोधों का एक ठोस विकल्प तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
आर्थिक चर्चाओं के समानांतर कूटनीतिक मोर्चे पर भी सरगर्मी अपने चरम पर है। प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को बिजनेस फोरम की बैठकों के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से खास मुलाकात की, जिसमें पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और द्विपक्षीय संबंधों के तमाम पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। जानकारों का मानना है कि ब्रिक्स मंच से एक साझा बयान जारी करने को लेकर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, हालांकि ईरान की ओर से अमेरिकी हमलों की निंदा जैसी तीखी भाषा पर सहमति बनाने को लेकर कुछ गतिरोध की आशंका भी जताई जा रही है। भारत कूटनीतिक संतुलन साधते हुए ऐसी भाषा के इस्तेमाल पर जोर दे रहा है जिस पर सभी सदस्य देश बिना किसी विवाद के राजी हो सकें और वैश्विक मंच पर एक एकजुट संदेश दिया जा सके।
भारत मंडपम में आज के मुख्य कार्यक्रम और कूटनीतिक गतिविधियां
आज के आधिकारिक कार्यक्रमों की श्रृंखला दोपहर 2:35 बजे एक बंद कमरे के सत्र के साथ शुरू होगी, जो ब्रिक्स देशों के आंतरिक रणनीतिक मंथन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके पश्चात शाम 5:05 बजे भारत मंडपम के भव्य लॉन में सभी राष्ट्राध्यक्षों की सामूहिक तस्वीर खींची जाएगी और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधारोपण कार्यक्रम संपन्न होगा। इन तमाम औपचारिक बैठकों और फोटो सत्रों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाम 7:30 बजे सभी मेहमान राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों के सम्मान में एक भव्य रात्रिभोज का आयोजन करेंगे। इस रात्रिभोज के दौरान अनौपचारिक वार्ताओं के जरिए कई बड़े कूटनीतिक समाधान निकलने की उम्मीद है, जो आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और भारत-चीन संबंधों की नई दिशा तय करेंगे।