खाड़ी में महायुद्ध का आगाज: ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी युद्धपोतों पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें
मध्य पूर्व में महीनों से सुलग रही बारूद की चिंगारी आखिरकार एक विनाशकारी प्रत्यक्ष सैन्य टकराव में तब्दील हो गई है। ईरान की एलीट सैन्य शाखा 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के एयरोस्पेस फोर्स ने क्षेत्रीय जलक्षेत्र में गश्त कर रहे अमेरिकी नौसेना के एक विशाल विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) और गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक (Guided-Missile Destroyer) को सीधे तौर पर निशाना बनाते हुए कई शक्तिशाली एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलों से भीषण हमला बोल दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया और स्टेट ब्रॉडकास्टर आईआरआईबी (IRIB) द्वारा जारी एक आधिकारिक सैन्य बयान में दावा किया गया कि अमेरिकी युद्धपोत ईरानी व्यापारिक जहाजों को परेशान कर रहे थे और इस्लामी गणराज्य की नौसैनिक नाकेबंदी में सक्रिय रूप से शामिल थे। तेहरान ने दावा किया कि उसके मिसाइल हमलों के बाद अमेरिकी युद्धपोत भारी नुकसान के डर से संघर्ष क्षेत्र छोड़कर पीछे हटने को मजबूर हो गए। ईरान के इस अप्रत्याशित और सीधे हमले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है, क्योंकि यह दशकों बाद ऐसा मौका है जब ईरानी सेना ने खुले तौर पर अमेरिकी नौसेना के शीर्ष जंगी जहाजों पर अपनी सबसे घातक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।
अमेरिकी नौसेना का दावा: मिसाइलों को हवा में ही चकमा देकर बचे जंगी जहाज, कोई सैनिक हताहत नहीं
ईरान के इस दुस्साहसिक हमले के तुरंत बाद संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा मंत्रालय (Pentagon) और यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक बयान जारी कर ईरानी दावों को खारिज किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि क्षेत्रीय जलक्षेत्र में नियमित गश्त पर तैनात अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक को निशाना बनाकर ईरान ने कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। हालांकि, अमेरिकी युद्धपोतों पर तैनात अत्याधुनिक एजिस मिसाइल डिफेंस शील्ड (Aegis Missile Defense System) और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-मेजर्स की मदद से अमेरिकी जहाजों ने ईरानी मिसाइलों को सफलतापूर्वक चकमा दे दिया। पेंटागन ने स्पष्ट किया कि इस हमले में किसी भी अमेरिकी सैनिक को खरोंच तक नहीं आई है और न ही जहाजों को कोई संरचनात्मक नुकसान पहुंचा है। वाशिंगटन ने इस हमले को 'बिना किसी उकसावे के किया गया कायराना कृत्य' करार देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक संपत्तियों को निशाना बनाने की कीमत तेहरान को बहुत भारी चुकानी पड़ेगी।
अमेरिका का भीषण पलटवार: CENTCOM ने ईरान के 3 बड़े तेल टैंकर किए नष्ट, एडमिरल कूपर की सख्त चेतावनी
ईरानी हमले के चंद घंटों के भीतर ही अमेरिकी सेना ने ऐसा विध्वंसक पलटवार किया जिसने ईरानी अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर सीधा प्रहार किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के सीधे निर्देश पर अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने समन्वित हवाई हमले करते हुए ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े तीन विशाल कच्चे तेल के टैंकरों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना ने सैटेलाइट और सटीक मिसाइल हमलों के जरिए खर्ग द्वीप (Kharg Island) के तटीय जलक्षेत्र में मौजूद कच्चे तेल के टैंकर 'एम/टी डाउनी' (M/T Downy) और जास्क (Jask) के पास 'एम/टी स्टार्क 1' (M/T Stark 1) को स्थायी रूप से पंगु (Permanently Disabled) बना दिया। इसके अलावा ओमान की खाड़ी में मौजूद तीसरे तेल वाहक पोत 'एम/टी काइलो' (M/T Kylo, जिसे नॉक्सन भी कहा जाता है) पर सटीक प्रहार कर उसे समुद्र की गहराइयों में डुबो दिया गया।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस भीषण हमले का वीडियो फुटेज जारी करते हुए दुनिया को अपनी कार्रवाई के सबूत भी पेश किए। एडमिरल ब्रैड कूपर ने आईआरजीसी को सीधी और खुली चेतावनी देते हुए कहा, "रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को हमारा संदेश बिल्कुल साफ होना चाहिए—यदि आप हमारे दो जहाजों पर गोली चलाएंगे, तो हम आपके तीन जहाजों को नष्ट करके आपसे कहीं बड़ा आर्थिक हर्जाना वसूल करेंगे। हम अमेरिकी सेना की रक्षा करने में एक सेकंड की भी हिचकिचाहट नहीं दिखाएंगे और यदि आवश्यक हुआ, तो हम ईरान के सीमित और असुरक्षित तेल बेड़े को पूरी तरह से खाक कर देंगे।" अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ये तीनों टैंकर ईरान के उस बहु-अरब डॉलर के 'शैडो नेटवर्क' का हिस्सा थे, जिसकी कमाई से आईआरजीसी अपने छद्म गुटों और सैन्य अभियानों को फंड करता है।
'हॉर्मुज स्ट्रेट' बना बारूदी अखाड़ा: जहाजों की आवाजाही ठप, कच्चे तेल के दामों में भूचाल
अमेरिका और ईरान के बीच समुद्र में छिड़े इस खूनी संघर्ष का केंद्र बिंदु रणनीतिक रूप से दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) बन चुका है। दुनिया के कुल तेल उपभोग का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। इस ताजा मिसाइल हमले और टैंकरों के विनाश के बाद हॉर्मुज से होकर गुजरने वाला वाणिज्यिक समुद्री यातायात ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। वैश्विक शिपिंग कंपनियों ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी से अपने विशाल तेल टैंकरों के मार्ग को पूरी तरह रोक दिया है या उन्हें अफ्रीका के लंबे चक्कर वाले रास्ते पर मोड़ दिया है। इस अभूतपूर्व नौसैनिक गतिरोध के चलते अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) और डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। ऊर्जा विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि यदि यह जलडमरूमध्य आगामी कुछ दिनों तक पूरी तरह बाधित रहा, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम 120 से 150 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू सकते हैं, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई का नया तूफान आ जाएगा।
तेहरान और वॉशिंगटन के बीच 'आंख के बदले आंख': ट्रंप के कड़े तेवर और IRGC की नई धमकियां
इस सैन्य संकट ने दोनों देशों के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के बीच की तल्खी को चरम पर पहुंचा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में स्पष्ट संकेत दिए थे कि ईरान के सैन्य और परमाणु ढांचे को बख्शा नहीं जाएगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया बयानों में हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी सैन्य नियंत्रण का दावा करते हुए इसे बेहद सख्त चेतावनी के साथ रेखांकित किया है। दूसरी ओर, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने खाड़ी के देशों और अंतरराष्ट्रीय पोतों को खुली धमकी जारी की है कि यदि कोई भी जहाज तथाकथित 'अनधिकृत जलमार्गों' से गुजरने की कोशिश करेगा, तो उसे मिसाइलों और सुसाइड ड्रोनों से निशाना बनाया जाएगा। ईरान ने सऊदी अरब की 'बहरी' और यूएई की 'एडनॉक' से जुड़े 50 से अधिक तेल टैंकरों की सूची भी जारी की है, जिन्हें जब्त करने या नष्ट करने की चेतावनी दी गई है। तेहरान का स्पष्ट रुख है कि यदि अमेरिका उसके तेल निर्यात पर प्रतिबंध या नौसैनिक घेराबंदी लगाएगा, तो वह इस क्षेत्र से किसी भी देश का एक बूंद तेल बाहर नहीं जाने देगा।
क्या तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ा है मध्य पूर्व? अंतरराष्ट्रीय समुदाय में खलबली
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच शुरू हुआ यह 'टिट-फॉर-टैट' (जैसे को तैसा) का खेल अब अनियंत्रित चरण में प्रवेश कर चुका है। अब तक यह लड़ाई सीरिया, इराक या यमन के हूती विद्रोहियों जैसे छद्म गुटों (Proxies) के जरिए लड़ी जा रही थी, लेकिन अब दोनों देशों की नियमित सेनाएं सीधे तौर पर एक-दूसरे की रणनीतिक संपत्तियों पर भारी हथियारों से प्रहार कर रही हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और प्रमुख यूरोपीय शक्तियों ने तत्काल युद्धविराम और संयम बरतने की अपील की है, लेकिन जिस तरह से अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरानी तेल संपत्तियों को निशाना बनाया है और ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइल ब्रिगेड को हाई-अलर्ट पर रखा है, उससे बड़े पैमाने पर पूर्ण युद्ध की आशंका गहरा गई है। यदि ईरान ने अमेरिकी सैन्य अड्डों या क्षेत्र में मौजूद अन्य अमेरिकी नौसैनिक बेड़ों पर दोबारा बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, तो पेंटागन ईरान की मुख्य भूमि पर स्थित मिसाइल साइटों, वायु रक्षा प्रणालियों और परमाणु प्रतिष्ठानों पर बड़े पैमाने पर हवाई बमबारी शुरू कर सकता है। खाड़ी की जलराशि में तैरते बारूद के धुएं ने साफ कर दिया है कि दुनिया इस समय एक नए और अत्यंत विनाशकारी महायुद्ध के मुहाने पर खड़ी है।