बिहार में बाढ़ का विकराल रूप: गंगा-गंडक और पुनपुन के उफान से 10 लाख से अधिक आबादी प्रभावित

बिहार में बाढ़ का विकराल रूप: गंगा-गंडक और पुनपुन के उफान से 10 लाख से अधिक आबादी प्रभावित

बिहार में मानसूनी बारिश और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों से लगातार छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी के चलते राज्य के 18 से अधिक जिलों में बाढ़ का संकट अत्यधिक गंभीर रूप ले चुका है। गंगा, गंडक, बूढ़ी गंडक, कोसी, सोन और पुनपुन नदियां एक साथ उफान पर हैं और दर्जनों स्थानों पर लाल निशान (खतरे के निशान) से 1 से 2.5 मीटर ऊपर बह रही हैं। राजधानी पटना, वैशाली (हाजीपुर), समस्तीपुर, बेगूसराय, भोजपुर, बक्सर, सारण और भागलपुर के ग्रामीण तथा तटीय इलाके पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं।

आपदा प्रबंधन विभाग और केंद्रीय जल आयोग (CWC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस अभूतपूर्व जल-प्रलय से राज्य की 10 लाख से अधिक की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। सैकड़ों गांव चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिरकर टापू बन चुके हैं। खेत-खलिहान, सड़कें, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र पानी में समा गए हैं, जिसके चलते लाखों लोग अपने मवेशियों और जरूरी गृहस्थी के सामान के साथ राष्ट्रीय राजमार्गों (NH), ऊंचे बांधों और रेलवे पटरियों के किनारे तिरपाल तानकर खुले आसमान के नीचे शरण लेने को विवश हो गए हैं।

पटना में 2016 की बाढ़ का टूटा रिकॉर्ड: गांधी घाट और दीघा में हाहाकार, पुनपुन ने बढ़ाई धड़कनें

राजधानी पटना और इसके ग्रामीण अनुमंडलों में बाढ़ की स्थिति बेहद नाजुक हो गई है। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर के पार पहुंच गया है, जिसने वर्ष 2016 की विनाशकारी बाढ़ के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। दीघा घाट, हाथीदह और मनेर में भी गंगा नदी लाल निशान से काफी ऊपर स्थिर बनी हुई है। दानापुर और मनेर के दियारा इलाकों की 50 से अधिक पंचायतों का जमीनी संपर्क पूरी तरह टूट चुका है।

गंगा के साथ-साथ पटना के दक्षिणी हिस्से से गुजरने वाली पुनपुन और दरधा नदियों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। श्रीपालपुर में पुनपुन नदी खतरे के निशान (50.60 मीटर) से 2.56 मीटर ऊपर 53.16 मीटर के खतरनाक स्तर पर बह रही है। पुनपुन के बाएं तटबंध और रिंग बांध पर पानी का भारी दबाव बना हुआ है। यदि यह तटबंध क्षतिग्रस्त होता है, तो बाढ़ का पानी सीधे पटना शहर के कंकड़बाग, बाईपास और संपतचक के रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर सकता है। लखना, चंदासी और फतेहपुर गांवों में पानी घुसने के बाद जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीमें 24 घंटे बालू की बोरियों (सैंडबैग्स) से रिंग बांध को बचाने में जुटी हुई हैं।

हाजीपुर में गंडक और गंगा का दोहरा वार: कौनहारा घाट डूबा, तेरसिया दियारा में हजारों बेघर

वैशाली जिले के हाजीपुर में गंगा और गंडक नदियों के संगम ने तबाही मचा रखी है। हाजीपुर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाला मोक्ष धाम 'कौनहारा घाट' पूरी तरह जलमग्न हो चुका है और शवदाह गृह तक पानी भर गया है। बाढ़ का पानी कौनहारा बाईपास रोड और रामचौरा मंदिर जाने वाली मुख्य सड़क पर 2 से 3 फीट तक बह रहा है, जिससे शहरी आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। डीआरसीसी (DRCC) जाने वाली सड़क पर भी पानी चढ़ चुका है।

गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी का सबसे खौफनाक असर राघोपुर और हाजीपुर के तेरसिया दियारा इलाके में देखा जा रहा है। तेरसिया में सैकड़ों पक्के और कच्चे मकान पहली मंजिल तक डूब चुके हैं, जिसके कारण हजारों लोग बेघर हो गए हैं। स्थानीय लोग अपनी जान बचाने के लिए गंगाब्रिज थाना के पास ऊंचे स्थानों और महात्मा गांधी सेतु के संपर्क मार्ग के किनारे डेरा डाले हुए हैं। दियारा क्षेत्र में नावों की भारी किल्लत के चलते ग्रामीण किसी तरह बांस-बल्ले के चाचरी पुल और केले के थंब की नाव बनाकर सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन कर रहे हैं।

समस्तीपुर और बेगूसराय में त्राहिमाम: ताजपुर-बख्तियारपुर फोरलेन डूबा, बांधों पर कट रही रातें

समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीननगर, मोहनपुर, पटोरी और विद्यापतिनगर प्रखंडों में गंगा नदी का रौद्र रूप जारी है। जल संसाधन विभाग दलसिंहसराय के अनुसार, सरारी कैंप पर गंगा का जलस्तर 47.75 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान (45.50 मीटर) से 2.25 मीटर ऊपर है। पानी का बहाव इतना तेज है कि निर्माणाधीन ताजपुर-बख्तियारपुर फोरलेन के एक बड़े हिस्से पर बाढ़ का पानी चढ़ गया है, जिससे निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो गया है और संपर्क टूट गया है।

प्रखंड के दक्षिणी डुमरी, बघरा, बरियारपुर, राजपुर जौनापुर, मटिऔर और विशनपुर बेरी पंचायतों के हजारों ग्रामीणों ने हाजीपुर-बछवाड़ा वाटरवेज बांध पर अपने पूरे परिवार और मवेशियों के साथ शरण ले रखी है।

उधर, पड़ोसी जिले बेगूसराय के मटिहानी, बछवाड़ा, शाम्हो और तेघड़ा प्रखंडों के दियारा क्षेत्र में भी गंगा का पानी घरों में घुस चुका है। शाम्हो प्रखंड का जिला मुख्यालय से संपर्क लगभग कट चुका है। किसानों की सैकड़ों एकड़ में लगी मक्का, केला, धान और हरी सब्जियों की फसलें पूरी तरह गलकर नष्ट हो गई हैं, जिससे अन्नदाताओं के सामने सालभर के राशन और मवेशियों के चारे का विकट संकट खड़ा हो गया है।

प्रशासन और राहत-बचाव दल अलर्ट पर: NDRF-SDRF की टीमें तैनात, कम्युनिटी किचन शुरू

बाढ़ की भयावह स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आला अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की है और सभी प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को राहत शिविर युद्धस्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए हैं।

धरातल पर चल रहे राहत कार्यों का विवरण इस प्रकार है:

  • रेस्क्यू ऑपरेशंस: बाढ़ प्रभावित इलाकों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 8 से अधिक टीमें और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टुकड़ियां मोटरबोट्स के साथ लगातार फंसे हुए बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं।

  • सरकारी नावें: आवागमन को सुचारु रखने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में 690 से अधिक सरकारी और निजी पंजीकृत नावों का परिचालन शुरू किया गया है।

  • सामुदायिक रसोई (Community Kitchens): विस्थापित परिवारों के लिए राहत शिविरों और बांधों पर दर्जनों कम्युनिटी किचन शुरू किए गए हैं, जहां शुद्ध पेयजल और दो वक्त के गर्म भोजन की व्यवस्था की जा रही है।

  • तटबंधों की 24 घंटे पहरेदारी: संवेदनशील तटबंधों की सुरक्षा के लिए हर 3 किलोमीटर पर जल संसाधन विभाग के सहायक व कनिष्ठ अभियंताओं को तैनात किया गया है। तटबंधों पर रात के समय हाई-मास्ट लाइटें लगाकर लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है ताकि किसी भी रिसाव (सीपेज) को तुरंत रोका जा सके।

  • राहत सामग्री: विस्थापितों के बीच अब तक हजारों पॉलीथिन शीट्स, सूखा राशन (चूड़ा, गुड़, सत्तू, माचिस) और क्लोरीन की गोलियों का वितरण किया गया है।

स्वास्थ्य संकट और संक्रामक बीमारियों की आशंका: स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीमें रवाना

बाढ़ का पानी रुकने और सड़कों पर सड़न शुरू होने के कारण प्रभावित क्षेत्रों में जलजनित बीमारियों (Water-borne diseases) का खतरा कई गुना बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित पंचायतों में मेडिकल मोबाइल वैन और डॉक्टरों की विशेष टीमें तैनात की हैं। पीड़ितों में डायरिया, हैजा, बुखार और त्वचा संक्रमण के मामले सामने आने लगे हैं। इसके अलावा बाढ़ग्रस्त इलाकों में जहरीले सांपों और कीड़े-मकोड़ों के काटने (Snake Bites) की घटनाओं में वृद्धि को देखते हुए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी-वेनम इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।

जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे पीने के पानी को हमेशा उबालकर पिएं, बच्चों को उफनती नदियों और घाटों से दूर रखें और किसी भी प्रकार की आपातकालीन सहायता के लिए जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के हेल्पलाइन नंबरों पर तुरंत संपर्क करें। मौसम विभाग के अगले दो दिनों के बारिश के पूर्वानुमान ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की नदियों में जलस्तर अभी कुछ दिन और उफान पर रहेगा, जिससे संकट से उबरने में अभी समय लग सकता है।