नेपाल बाढ़ त्रासदी: भारत का देवदूत बना ऑपरेशन मैत्री 2.0, IAF का विमान 5.5 टन दवाएं लेकर काठमांडू पहुंचा; 166 भारतीय सुरक्षित निकाले गए
पड़ोसी देश नेपाल में कुदरत का भीषण कहर टूटा है। लगातार कई दिनों से हो रही मूसलाधार मानसूनी बारिश और उसके बाद आई विनाशकारी बाढ़ व लैंडस्लाइड (भूस्खलन) ने हिमालयी देश के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई है। कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, पुल बह चुके हैं, प्रमुख राजमार्ग कट गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। इस मानवीय संकट की घड़ी में भारत ने एक बार फिर अपनी 'पड़ोसी प्रथम' (Neighbourhood First) नीति और अटूट मित्रता की मिसाल पेश करते हुए त्वरित स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है। संकट की इस घड़ी में भारतीय वायुसेना (IAF) का विशेष परिवहन विमान राहत सामग्री और आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेकर काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा है। इसके साथ ही विभिन्न प्रभावित इलाकों में फंसे 166 भारतीय नागरिकों को रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाल लिया गया है।
5.5 टन आपातकालीन जीवनरक्षक दवाएं और राहत सामग्री की पहली खेप
नेपाल सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील और विकट हालात को देखते हुए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय ने मिशन मोड में समन्वय स्थापित किया। भारतीय वायुसेना का विशेष विमान हिंडन एयरबेस से 5.5 टन महत्वपूर्ण चिकित्सा आपूर्ति, एंटीबायोटिक्स, पेनकिलर्स, ओआरएस पैकेट्स, जल शोधन गोलियां (Water Purification Tablets) और सर्जिकल सामग्री लेकर काठमांडू पहुंचा। बाढ़ प्रभावित इलाकों में जलजनित बीमारियों (Water-borne diseases) जैसे डायरिया, हैजा और त्वचा संक्रमण फैलने का खतरा सबसे अधिक होता है। भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने हवाई अड्डे पर इस मेडिकल कंसाइनमेंट को नेपाल के स्वास्थ्य और राहत अधिकारियों को विधिवत सौंपा, ताकि इसे तुरंत दूरदराज के संवेदनशील इलाकों तक पहुंचाया जा सके।
भूस्खलन और सैलाब में फंसे 166 भारतीयों को सुरक्षित किया रेस्क्यू
भारी बारिश और भूस्खलन के कारण नेपाल के काठमांडू वैली, पोखरा और बॉर्डर से सटे पहाड़ी रास्तों पर कई भारतीय तीर्थयात्री, पर्यटक और पेशेवर फंस गए थे। सड़कें टूट जाने और मोबाइल नेटवर्क ठप होने से लोगों का अपने परिजनों से संपर्क टूट गया था। भारतीय दूतावास ने काठमांडू में 24×7 आपातकालीन हेल्पलाइन केंद्र स्थापित किया। विशेष बचाव दलों और स्थानीय नेपाली प्रशासन की मदद से भारतीय वायुसेना और स्थानीय हेलीकॉप्टरों के जरिए अत्यधिक जोखिम वाले इलाकों से 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। सुरक्षित निकाले गए लोगों को प्राथमिक उपचार, भोजन और सुरक्षित स्थानों पर रुकने की व्यवस्था दी गई, जहां से उन्हें भारत वापसी के लिए रवाना किया जा रहा है।
नेपाल के काठमांडू और तराई इलाकों में बाढ़ का तांडव
नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, कई दशक बाद ऐसी मूसलाधार बारिश दर्ज की गई है। बागमती, कोसी, नारायणी और गंडक जैसी प्रमुख नदियां उफान पर हैं, जिससे निचले रिहायशी इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। काठमांडू के कई हिस्से पानी में डूबे हैं और राजधानी को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले पृथ्वी हाईवे समेत कई मुख्य संपर्क मार्ग बड़े-बड़े पत्थरों और मलबे के गिरने से अवरुद्ध हैं। नेपाल पुलिस और सेना की टीमें नावों और हेलिकॉप्टरों से लगातार लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचा रही हैं, लेकिन खराब मौसम बचाव कार्य में लगातार रोड़ा बन रहा है।
'नेबरहुड फर्स्ट': संकट में हमेशा पहला रिस्पॉन्डर रहा भारत
भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराना 'रोटी-बेटी' और सांस्कृतिक नाता रहा है। साल 2015 के विनाशकारी भूकंप के समय भी भारत पहला देश था जिसने 'ऑपरेशन मैत्री' के तहत तत्काल एनडीआरएफ की टीमें, फील्ड अस्पताल और कई टन राहत सामग्री भेजी थी। इस बार भी भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि नेपाल के लोगों को इस प्राकृतिक आपदा से उबारने के लिए भारत हर संभव मानवीय, तकनीकी और लॉजिस्टिकल सहायता देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर राहत सामग्री की अतिरिक्त खेप और बचाव उपकरण भी तुरंत भेजे जाएंगे।
उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जिलों में भी हाई अलर्ट
नेपाल की पहाड़ियों में लगातार हो रही बारिश का सीधा असर भारत के सीमावर्ती राज्यों उत्तर प्रदेश और बिहार पर भी देखने को मिल रहा है। नेपाल की नदियों से छोड़े जा रहे अतिरिक्त पानी के चलते बिहार के सुपौल, मधुबनी, पश्चिम चंपारण और उत्तर प्रदेश के बहराइच, लखीमपुर खीरी व महाराजगंज के तराई क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय प्रशासन ने नदियों के जलस्तर पर नजर रखने के लिए फ्लड कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए हैं और एनडीआरएफ (NDRF) व एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को अलर्ट मोड पर तैनात किया गया है।