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March 16 2026 12:36 pm

World War 3 की आहट? ईरान को मिला रूस और चीन का सैन्य कवच, अमेरिका-इजरायल के खिलाफ तेहरान का बड़ा खुलासा

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News India Live, Digital Desk : मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग के बीच एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने दुनिया भर में खलबली मचा दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि अमेरिका और इजरायल के साथ जारी युद्ध में ईरान को रूस और चीन से 'सैन्य सहयोग' (Military Cooperation) मिल रहा है। अरागची ने इन दोनों देशों को तेहरान का 'रणनीतिक साझेदार' बताते हुए साफ कर दिया है कि ईरान अब इस लड़ाई में अकेला नहीं है।

रूस और चीन: ईरान के नए 'टेक्नोलॉजिकल एंकर' एक हालिया इंटरव्यू में अरागची ने कहा कि रूस और चीन के साथ ईरान का सहयोग केवल आर्थिक या राजनीतिक नहीं, बल्कि रक्षा क्षेत्र में भी बहुत गहरा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस ईरान को S-400 एयर डिफेंस सिस्टम और इंटेलिजेंस डेटा (खुफिया जानकारी) मुहैया करा रहा है, जिससे ईरान को अमेरिकी युद्धपोतों की सटीक लोकेशन ट्रैक करने में मदद मिल रही है। वहीं, चीन द्वारा दी जा रही तकनीकी मदद ईरान की मिसाइल गाइडेंस प्रणाली को और घातक बना रही है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य: केवल 'दुश्मनों' के लिए बंद विदेश मंत्री ने दुनिया को चेतावनी देते हुए कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन यह केवल उन देशों के लिए बंद रहेगा जो ईरान के प्रति शत्रुता रखते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "यह रास्ता अमेरिकी और इजरायली जहाजों व टैंकरों के लिए बंद है, बाकी दुनिया के लिए नहीं।" इस बयान के बाद वैश्विक तेल बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है और कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार बनी हुई हैं।

ट्रंप की चेतावनी और रूस का रुख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में संकेत दिए थे कि व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की भूमिका का बदला लेने के लिए ईरान की मदद कर सकते हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर किए जा रहे सटीक हमलों के पीछे रूसी सैटेलाइट डेटा और 'शहीद' ड्रोन्स की उन्नत तकनीक का बड़ा हाथ है।

क्षेत्रीय युद्ध का बढ़ता दायरा ईरान ने साफ कर दिया है कि यदि उसके तेल ठिकानों या परमाणु केंद्रों (जैसे खर्ग द्वीप) को निशाना बनाया गया, तो वह पूरे खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा बुनियादी संरचना को नष्ट कर देगा। चीन और रूस के खुले समर्थन के बाद अब यह संघर्ष केवल दो देशों के बीच न रहकर एक बड़े वैश्विक शक्ति प्रदर्शन (Global Power Struggle) में तब्दील होता दिख रहा है।