Google Story: BackRub से Google तक का सफर एक मामूली स्पेलिंग मिस्टेक ने कैसे बनाया दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन
News India Live, Digital Desk: आज हम किसी भी जानकारी के लिए तुरंत 'गूगल' करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मल्टी-बिलियन डॉलर कंपनी का नाम असल में कुछ और ही होने वाला था? गूगल की शुरुआत 1996 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के दो छात्रों, लैरी पेज (Larry Page) और सर्जी ब्रिन (Sergey Brin) ने एक रिसर्च प्रोजेक्ट के तौर पर की थी।
जब नाम था 'BackRub' (बैकरब)
शुरुआत में लैरी और सर्जी ने अपने सर्च इंजन का नाम 'BackRub' रखा था। इसके पीछे एक तकनीकी कारण था यह सर्च इंजन वेबसाइट्स के 'बैकलिंक्स' (Backlinks) को ट्रैक करके उनकी अहमियत तय करता था। हालांकि, यह नाम सुनने में थोड़ा अजीब था और किसी टेक कंपनी के बजाय स्पा सर्विस जैसा लगता था।
'Googol' से 'Google' बनने की कहानी: वो एक गलती!
1997 में लैरी और उनके साथियों ने एक नया और प्रभावशाली नाम रखने के लिए ब्रेनस्टॉर्मिंग शुरू की।
गणितीय प्रेरणा: वे एक ऐसा नाम चाहते थे जो इंटरनेट पर मौजूद सूचनाओं के विशाल भंडार को दर्शा सके। उनके एक साथी, शॉन एंडरसन ने 'Googolplex' शब्द सुझाया, जिसे छोटा करके 'Googol' कर दिया गया।
Googol का मतलब: गणित में 'Googol' का अर्थ है $1$ के पीछे $100$ शून्य ($10^{100}$)। यह नाम उनके मिशन—दुनिया भर की जानकारी को व्यवस्थित करना—के लिए एकदम सटीक था।
वो ऐतिहासिक गलती: जब शॉन एंडरसन इंटरनेट पर यह चेक कर रहे थे कि क्या googol.com डोमेन उपलब्ध है, तो उन्होंने गलती से 'google.com' टाइप कर दिया।
किस्मत का फैसला: लैरी पेज को यह 'गलत स्पेलिंग' वाला नाम असली नाम से भी ज्यादा पसंद आया। उन्हें यह छोटा, बोलने में आसान और आकर्षक लगा। बस फिर क्या था, 15 सितंबर 1997 को उन्होंने इसी नाम से डोमेन रजिस्टर कर लिया।
गैरेज से लेकर ग्लोबल लीडर तक
गूगल की आधिकारिक शुरुआत एक गैरेज से हुई थी। सबसे पहले सन माइक्रोसिस्टम्स के को-फाउंडर एंडी बेचटोल्शेम ने गूगल को $1,00,000$ डॉलर का चेक दिया था। दिलचस्प बात यह है कि उस वक्त तक 'Google Inc.' नाम की कोई कानूनी कंपनी अस्तित्व में नहीं थी, चेक मिलने के बाद कंपनी को रजिस्टर कराया गया।