Kanpur Industry Crisis : कानपुर के उद्योगों पर ईंधन' का ग्रहण गैस की कमी से 150 यूनिट्स बंद, 1 लाख नौकरियों पर खतरा
News India Live, Digital Desk: कानपुर की औद्योगिक नगरी इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। ईरान-इजरायल युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली सप्लाई बाधित होने से न केवल एलपीजी (LPG) और पीएनजी (PNG) की किल्लत हो गई है, बल्कि प्लास्टिक उद्योग के लिए जरूरी 'पॉलिमर' के दाम भी आसमान छू रहे हैं।
प्रमुख संकट: गैस की कमी और फैक्ट्रियों में ताला (Industrial Blackout)
फैब्रिकेशन और मेटल यूनिट्स बंद: शहर की करीब 150 फैब्रिकेशन इकाइयां, जो मेटल कटिंग के लिए कमर्शियल गैस का उपयोग करती थीं, पूरी तरह बंद हो गई हैं। सिलेंडर न मिलने के कारण रोजाना करोड़ों का उत्पादन ठप है।
PNG में 20% की कटौती: पाइप नेचुरल गैस (PNG) की आपूर्ति में हुई भारी कटौती ने बिस्कुट और कन्फेक्शनरी निर्माताओं को उत्पादन आधा करने पर मजबूर कर दिया है।
नाइट शिफ्ट पर रोक: गैस संकट के चलते लगभग 2000 फैक्ट्रियों में नाइट शिफ्ट बंद कर दी गई है, जिससे दिहाड़ी मजदूरों की कमाई पर सीधा असर पड़ा है।
प्लास्टिक उद्योग और छंटनी का खौफ (Impact on Plastic Industry)
कच्चे माल की किल्लत: प्लास्टिक और पैकेजिंग उद्योग के लिए मुख्य कच्चा माल (Polyethylene और Polypropylene) मिडिल ईस्ट से आता है। युद्ध के कारण इनकी कीमतों में 20% से 30% तक का उछाल आया है।
नौकरियों पर तलवार: औद्योगिक संगठनों (जैसे KIESA) का दावा है कि अगर अगले 15 दिनों में स्थिति नहीं सुधरी, तो करीब 1 लाख श्रमिकों को छंटनी का सामना करना पड़ सकता है। कई एमएसएमई (MSME) इकाइयों ने पहले ही छंटनी शुरू कर दी है।
500 करोड़ का निर्यात फंसा: कानपुर से चमड़ा, टेक्सटाइल और प्लास्टिक के लगभग ₹500 करोड़ के ऑर्डर समुद्री मार्ग बंद होने के कारण बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं।
बाजार में 'आर्टिफिशियल बूम' और हाहाकार
ईंधन संकट के डर से कानपुर के कुकिंग अप्लायंसेज बाजार में इंडक्शन स्टोव की मांग 10 गुना बढ़ गई है। जो स्टॉक एक साल में बिकता था, वह महज एक हफ्ते में खत्म हो गया है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगी हैं और पुलिस की मौजूदगी में सिलेंडर बांटे जा रहे हैं।